प्यासा हूँ मैं
प्यासा हूँ मैं

💧 प्यासा हूँ मैं 💧

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उल्फ़त का ही प्यासा हूँ मैं

वो बदला आवारा हूँ मैं

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 यार रहूं ख़ुश कैसे मैं अब

अंदर से ही टूटा हूँ मैं

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भेज ख़ुदा दोस्त यहां अब तो

जीवन में रब तन्हा हूँ मैं

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लोगों ने बदनाम किया है

यार शराब न पीता हूँ मैं

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दिल यार यहां न लगे है अब

दूर कहीं अब चलता हूँ मैं

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रोज़ दिखाता यार नज़ाकत

उल्फ़त जिसमे करता हूँ मैं

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कैसे भूलूं उसको दिल से

उसके ग़म में जलता हूँ मैं

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चैन नहीं दिल को आज़म के

ग़म की आहें भरता हूँ मैं

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शायर: आज़म नैय्यर

( सहारनपुर )

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