Hindi vyang kavita

बोनस होली मे आयेगा | Hindi vyang kavita

बोनस होली मे आयेगा

( Bonus holi me aayega )

 

बचपन का मजा हंसी ढिठोली में आयेगा।
जो बाकी रहेगा वो रंगोली में आयेगा।।

 

ये हमारी तरक्की नहीं तो और क्या कहें,
दीपावली का बोनस होली में आयेगा।।

 

मुद्दत से आंख लगा के रखा हुआ हूं मैं,
न जाने किस दिन वो मेरी झोली में आयेगा।

 

बाजार तक तो तुमने पहुंचा दिया हमें,
अब देखना है उसको जो बोली में आयेगा।।

 

कुछ लोग मुंतजिर थे मुंतजिर ही रह गये,
मेरा भी नाम क्या उसी टोली में आयेगा।।

 

कुछ लोग कह रहे हैं शेष पर यकीं नहीं
तूफान भी दिये की ही डोली में आयेगा।।

 

?

कवि व शायर: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद
मीरजापुर ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

शिक्षक | Shikshak Par Kavita

Similar Posts

  • स्वप्न | Swapan

    स्वप्न ( Swapan )    घरों से दूर होते तो कोई बात न होती हम तो आज दिलों से ही दूर जा रहे हैं ललक तो सभी को है कुछ कर गुजरने की मगर करना है क्या सही,ये ही भूले जा रहे हैं समझ बैठे हैं खुद को ही ,अफलातून हम जीत की होड़ मे,बुजुर्ग…

  • सुनहरी सुबह  | Kavita

        सुनहरी सुबह   ( Sunahri subah )      सुनहरी सुबह नि:स्वार्थ भाव से प्रतिदिन सुबह आती है || आँख बंद थी अभी, खोए थे मीठे सपनों में | कुछ हंसीन प्यारे पल थे, हमारे अपनों में | तभी सुनहरी धूप ने दस्तक दी, नींद टूट गई | अंगडाई ले कर उठ गए, और…

  • तुमसे ही हिम्मत | Kavita tumse hi himmat

    तुमसे ही हिम्मत ( Tumse hi himmat )   तुम से ही हौसला हमारा तुमसे ही हिम्मत हमारी तुम दिल का करार हो मनमीत दिल की हो प्यारी   जीवन के इस सफर में हमसफ़र हो तुम हमारी कदम कदम पे साथ देती महके आंगन फुलवारी   उन्नति आशा की किरणें प्रगति पथ पे प्रेरणा…

  • राधा रानी की प्रेम की होली

    राधा रानी की प्रेम की होली राधा की चुनर है पीलीकृष्ण संग खेले राधे होलीप्रेम का रंग सदा बरसाती हैराधा रानी सबको ही भाती है। गोपियों को करके किनारेराधा रानी है पिचकारी ताने,कृष्ण पर गुलाल बरसाती हैराधा रानी प्रेम की होली खेलाती है, पिचकारी में भर के रंग,कृष्ण भिगोते गोपियों के अंगराधा देख – देख…

  • शक की बीमारी | Poem shak ki bimari

    शक की बीमारी ( Shak ki bimari )    कोई व्यक्ति ना पालना ये शक वाली बीमारी, छीन लेती है सुकून घर परिवार का ये हमारी। इसी शक से हो जाती अक्सर रिश्तों में दरारें, शक पर सुविचार एवं लिख रहा हूं में शायरी।।   आज-कल हर आदमी है इसी शक के घेरे में, पहले…

  • आज का काव्यानंद | डॉ० रामप्रकाश ‘पथिक’

    जल का बल बढ़ा हुआ है आजकल, नालों का अभिमान।सब पथिकों के मार्ग में, बने हुए व्यवधान।। नदियाँ पोखर ताल सब, बने कष्ट के हेतु।जल के बल ने कर दिए, व्यर्थ बहुत से सेतु।। भारी बम-बौछार समांत— आरपदांत—- बचाओ इस दुनिया कोमात्राभार- २४छंद — रोला भारी बम-बौछार, बचाओ इस दुनिया को।मचता हाहाकार, बचाओ इस दुनिया…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *