गुरु

गुरु | Guru par kavita in Hindi

गुरु

( Guru ) 

 

गुरु तुम दीपक मैं अंधकार ,

किए हैं मुझपे आप उपकार,

 

पड़ा है मुझपर ज्ञान प्रकाश,

बना है जीवन ये उपवास,

 

करें नित मुझ पर बस उपकार ,

सजे मेरा जीवन घर द्वार,

 

गुरु से मिले जो  ज्ञान नूर,

हो जाऊं मैं जहां में मशहूर

 

गुरु से मिले हैं जो मार्गदर्शन,

हो गए हैं मुझे भगवान के दर्शन

 

गुरु तुम दीपक मैं अंधकार,

किए हैं मुझपे आप उपकार।

 

 

Dheerendra

लेखक– धीरेंद्र सिंह नागा

(ग्राम -जवई,  पोस्ट-तिल्हापुर, जिला- कौशांबी )

उत्तर प्रदेश : Pin-212218

यह भी पढ़ें : 

सच का आइना | Sach ka aaina

Similar Posts

  • दस्तूर | Dastoor

    दस्तूर ( Dastoor ) दस्तूर दुनिया का ,निभाना पड़ता है ।अनचाहे ही सही ,सब सह जाना पड़ता है ।सच को ही हमेशा ,हमें छुपाना पड़ता है ।वक्त तो चलता जाता ,हमें रूक जाना पड़ता है ।बिना प्रेम के भी कभी ,रिश्ता निभाना पड़ता है ।आते हैं दुनिया में तो ,जीकर जाना पड़ता है ।जज्बातों को…

  • लीलाधारी श्रीकृष्ण | Kavita

    “लीलाधारी श्रीकृष्ण” ( Leela Dhari Sri Krishna )   लीलाधारी श्री कृष्ण लीला अपरंपार आकर संकट दूर करो प्रभु हे जग के करतार   लीलाधारी हे श्री कृष्णा चक्र सुदर्शन धारी हो माता यशोदा के गोपाला गोपियों के गिरधारी हो   हे केशव माधव दामोदर सखा सुदामा सुखदाता अगम अगोचर अविनाशी जगकर्ता विश्व विधाता  …

  • हमारे नाम की मेहंदी | Mehndi par Kavita

    हमारे नाम की मेहंदी ( Hamare naam ki mehndi )    रचा लेना इन हाथों में हमारे नाम की मेहन्दी, बारात लेकर आऊॅंगा मैं आपके द्वार जल्दी। ये थोड़े दिनों का इन्तजार अब और है करना, तैयारियां कर लो लगाने की चन्दन व हल्दी।। ये मेहन्दी वाले हाथ सभी को अच्छे है‌ लगते, हिन्दू धर्म…

  • अर्थ जगत | Kavita Arth Jagat

    अर्थ जगत ( Arth Jagat )   अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ************ उद्गम राजस्थानी मरुथल धरा, न्यून वृष्टि संसाधन विहीन । तज मातृभूमि आजीविका ध्येय अंतर्मन श्रम निष्ठ भाव कुलीन । प्रायः राष्ट्र हर क्षेत्र श्री गमन , लघु आरंभ बुलंद आर्थिक आवाज । अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ।।…

  • कागज के पुतले मत फूंको | Kavita kaagaz ke putle mat funko

    कागज के पुतले मत फूंको ( Kaagaz ke putle mat funko )     कागज के पुतले मत फूंको मन का अंधियारा दूर करो। जो दंभ छिपाये बैठे हो वो अंतर्मन अभिमान चूर करो।   लूट खसोट बेईमानी काले कारनामों की भरमार। जालसाजी रिश्वतखोरी अब फैल रहा है भ्रष्टाचार।   अभिमान को नष्ट करो जो…

  • अपने हक को जाने | Apne Hak ko Jane

    अपने हक को जाने ( Apne hak ko jane )  वह मां थी दो बेटो की बुढ़ापे में ढूंढते ढूंढते पास मेरे वो आई थी बिना पूछे ही बयां करती आंखें छल छला आई थी l खुद के घर में खुद रहने को अधिकार मांगने आई थी l शब्दों के तीखे वाणों से छलनी होकर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *