Chhand daan aur dakshina

दान और दक्षिणा | Chhand daan aur dakshina

दान और दक्षिणा

( Daan aur dakshina )

 

मनहरण घनाक्षरी

 

 

दान दीजिए पात्र को,
दक्षिणा विप्र जो होय।
रक्तदान महादान,
जीवन बचाइए।

 

पात्र सुपात्र को देख,
दान जरूर कीजिए।
अन्नदान सर्वोत्तम,
भोजन खिलाइए।

 

अनुष्ठान करे कोई,
जप तप पूजा-पाठ।
ब्राह्मण भोजन करा,
दक्षिणा दिलाइए।

 

तुलादान छायादान,
कर सको कन्यादान।
त्याग की शुभ भावना,
उर मे जगाइए।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

प्यासा मन | Geet pyasa man

Similar Posts

  • दिव्य अनुभूति | Divya anubhuti | Chhand

    दिव्य अनुभूति ( Divya anubhuti ) मनहरण घनाक्षरी   साधना आराधना से, दिव्य अनुभूति पाई। त्याग तप ध्यान योग, नित्य किया कीजिए‌।   हरि नाम सुमिरन, जपो नित अविराम। राम राम राम राम, भज लिया कीजिए।   मंदिर में दीप कोई, जलाता ले भक्तिभाव। रोशन यह जग सारा, ध्यान किया कीजिए।   घट घट वासी…

  • वृद्धाश्रम | Bridhashram Chhand

    वृद्धाश्रम ( Bridhashram )   मनहरण घनाक्षरी   पावन सा तीर्थ स्थल, अनुभवों का खजाना। बुजुर्गों का आश्रय है, वृद्धाश्रम आइए।   बुजुर्ग माता-पिता को, सुत दिखाते नयन। वटवृक्ष सी वो छाया, कभी ना सताइए।   हिल मिलकर सभी, करें सबका सम्मान। वृद्धाश्रम में प्रेम के, प्रसून खिलाइए।   जीवन के अनुभव, ज्ञान का सागर…

  • चिंता | Chhand chinta

    चिंता ( Chinta ) मनहरण घनाक्षरी   चिंता चिता समान है, तन का करें विनाश‌ खुशियों से झोली भरे, थोड़ा मुस्कुराइए।   छोड़ो चिंता जागो प्यारे, खुशियां खड़ी है द्वारे। हंसो हंसाओ सबको, माहौल बनाइए।   अंतर्मन जलाती है, आत्मा को ये रुलाती है। अधरो की मुस्कानों को, होंठों तक लाइए।   मत कर चिंता…

  • चंद्रयान की सफलता | Chandrayaan ki Safalta

    चंद्रयान की सफलता ( Chandrayaan ki safalta )   दुर्लभ को सम्भव किया, भारत देश महान।। चन्द्रयान की सफलता, जय जय जय विज्ञान।। जय जय जय विज्ञान, निराली तेरी माया। भारत अनुसंधान, जगत में अव्वल छाया। कहैं शेष कविराय, जियें वैज्ञानिक वल्लभ। कुशल प्रशासन नीति, मिथक तोड़े सब दुर्लभ।।   लेखक: शेषमणि शर्मा”इलाहाबादी” प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद…

  • अतिक्रांत छंद – विषममात्रिक

    जय गणेश जय गणेश गणपति दाता, तुम्हीं हो मेरे अपने,कर जोड़े द्वारे ठाढ़ी, कर दों पूरे सपने l हो प्रसन्न जग के स्वामी, फलित कर्मों में जलती ,मैं पापी लम्पट लोभी, अगणित करती गलती l अज्ञानी पर हूँ बालक, लगा चरणों से अपने ,अंजानी राहें चल कर, लागे माला जपने l प्रभु ज्ञानी अंतरयामी, प्रणामी…

  • बसंत | मनहरण घनाक्षरी | Basant ritu par chhand

    बसंत   हर्षाता खुशियां लाया, सुहाना बसंत आया। बहारें लेकर आया, झूम झूम गाइए।   मधुमास मदमाता, उर उमंगे जगाता। वासंती बयार आई, खुशियां मनाइए।   पीली सरसों महकी, खिली कलियां चहकी। फूलों पे भंवरे छाए, प्रेम गीत गाइए।   प्रीत के तराने छेड़े, मुरली की तान मीठी। मदन मोहन बंसी, मधुर बजाइये।     कवि…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *