प्रथम पूज्य आराध्य गजानन

अतिक्रांत छंद – विषममात्रिक

जय गणेश

जय गणेश गणपति दाता, तुम्हीं हो मेरे अपने,
कर जोड़े द्वारे ठाढ़ी, कर दों पूरे सपने l

हो प्रसन्न जग के स्वामी, फलित कर्मों में जलती ,
मैं पापी लम्पट लोभी, अगणित करती गलती l

अज्ञानी पर हूँ बालक, लगा चरणों से अपने ,
अंजानी राहें चल कर, लागे माला जपने l

प्रभु ज्ञानी अंतरयामी, प्रणामी तेरी गरिमा l
दे मुझको इतना गौरव, समझूँ सारी अणिमा l

मैं फिरती मारी मारी, तुझे करुणा कब करनी ,
तुम ठहरे जीवन स्वामी, बस हम को ही भरनी l

Sushila Joshi

सुशीला जोशी

विद्योत्तमा, मुजफ्फरनगर उप्र

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • मतदान | मनहरण घनाक्षरी | Poem on voting in Hindi

    मतदान ( Matdan )   चुने हम सरकार सबका है अधिकार राष्ट्र निर्माण करने मतदान कीजिए   मतदान महादान अधिकार पहचान लोकतंत्र मजबूत कर वोट दीजिए   सशक्त हो जनादेश मतदान है विशेष सोच समझ अमूल्य वोट जरा दीजिए   उम्मीदवार खरा हो वो राष्ट्रप्रेम भरा हो स्वच्छ छवि रखता हो चुन जरा लीजिए    …

  • जीत | Jeet

    जीत ( Jeet )  मनहरण घनाक्षरी   दिल जितना चाहो तो, दिल में उतर जाओ। मीठे बोल प्यार भरा, गीत कोई गाइए। जग जितना चाहो तो, लड़ना महासमर। शौर्य पराक्रम वीर, कौशल दिखाइए। औरों के हित जो लड़े, समर जीत वो जाते। दीन हीन लाचार को, गले से लगाइए। जीतकर शिखर से, अभिमान ना करना।…

  • श्याम बसे घट घट | Shyam Base Ghat Ghat

    श्याम बसे घट घट ( Shyam base ghat ghat )    हरिहरण घनाक्षरी   रामजी बसा लो घट, श्याम बसे घट घट। पणिहारी पनघट, भर लाई नीर घट। भोर भई निशा घट, प्रेम रहा उर घट। राम बसे जब घट, पाप सारा जाए घट। सर तीर भर घट, छलकत अध घट। जला दीप घट घट,…

  • सावन सुहाना आया | छंद

    सावन सुहाना आया | Chhand ( Sawan suhana aya ) (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   सावन सुहाना आया, आई रुत सुहानी रे। बरसो बरसो मेघा, बरसाओ पानी रे।   बदरा गगन छाए, काले काले मेघा आये। मोर पपीहा कोयल, झूमे नाचे गाए रे।   रिमझिम रिमझिम, बरखा बहार आई। मौसम सुहाना आया, हरियाली छाई…

  • उलझन भरी जिंदगी | Zindagi par chhand

    उलझन भरी जिंदगी ( Uljhan bhari zindagi )    संघर्षों से भरी जिंदगी, उलझन सी जिंदगी। हौसला बुलंद कर, नेह बरसाइए। राहें कठिन हो चाहे, पथ आंधी तूफां आए। लक्ष्य साध गीत प्यारा, तराना सुनाइए। आसां नहीं है चलना, मुश्किलों से यूं लड़ना। उलझन जिंदगी को, मधुर बनाइए। प्यार के मोती लुटाओ, प्रेम सुधा बरसाओ।…

  • भीनी भीनी चांदनी | Chhand bhini bhini chandni

    भीनी भीनी चांदनी ( Bhini bhini chandni ) विधा मनहरण घनाक्षरी     उज्जवल उज्जवल, भीनी भीनी मद्धम सी। दूधिया सी भीगो रही, दिव्य भीनी चांदनी।   धवल आभा बरस, सुधा रस बांट रही। आनंद का अहसास, देती भीनी चांदनी।   चांद यूं छलका रहा, अमृत रस भंडार। हर्ष खुशी मोद करे, दुलार भीनी चांदनी‌।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *