Poem on Children’s day in Hindi

बाल दिवस | Poem on Children’s day in Hindi

बाल दिवस

( Bal diwas ) 

 

चाचा नेहरू सबके प्यारे प्रथम प्रधानमंत्री हमारे।
बच्चों की आंखों के तारे प्रेम करते बालक सारे।

 

भावी कर्णधार बालक है देश का सौभाग्य यही।
बाल दिवस भारत मनाए चाचाजी ने बात कही।

 

हर्ष खुशी आनंद मौज से सब हंसते खेलते गाते।
घर परिवार स्कूलों में मिलकर बाल दिवस मनाते।

 

पढ़े-लिखे आगे बढ़े प्रगति पथ पर होकर सवार।
देश के उत्थान में हम सब युवा बने भागीदार।

 

बच्चों के चेहरे पर खुशियां महके फूल गुलाब से।
दिल के चमन खिल जाए मिलते बालक आपसे।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

तृष्णा आकांक्षाओं का सागर | Akanksha par kavita

Similar Posts

  • उठे जब कलम कोई | Kavita uthe jab kalam koi

    उठे जब कलम कोई ( Uthe jab kalam koi )   उठे जब कलम कोई सिंहासन डोल जाता है सोया सारा धीरज जनता का बोल जाता है   सड़के  पूल  को निगले वो दिग्गज बड़े भारी चंद चांदी के सिक्कों में कुर्सियां खरीदते सारी   राज काली करतूतों का भांडा फूट जाता है उठे जब…

  • Hindi Poetry | Hindi Kavita | Hindi Poem -विष प्याला

    विष प्याला ( Vish Pyala )   क्रूर हृदय से अपनों ने, जीवन भर  दी  विष प्यालों में। जबतक आग को हवा दी तबतक,शेर जला अंगारों में। कोमल मन के भाव  सभी, धूँ  धूँकर तबतक  जले मेरे, जबतब प्रेम हृदय से जलकर,मिट ना गया मन भावों से।   ** नगमस्तक भी रहा तभी तक, जबतक…

  • शिव शंकर प्यारे | Shiv Shankar Pyare

    शिव शंकर प्यारे ( Shiv Shankar Pyare )   शिव शंकर प्यारे ओ भोले डमरू की डम डम ओ चिमटा बाज रहा छम छम निश दिन तुझे पुकारे शिव ओ शंभू प्यारे जटा से बहे भगीरथी धारा औघड़ दानी शंकर प्यारा भोले शंकर सबके सहारे हर लो बाबा कष्ट हमारे ओ शंभू प्यारे शिव शंभू…

  • नादान | Nadan

    नादान ( Nadan )    धूप से गुजरकर ही पहुंचा हूं यहांतक हमने देखी ही अपनी परछाई इसीलिए रहता हूं हरदम औकात मे अपनी और,कुछ लोग इसी से मुझे नादान भी कहते हैं ,…. अक्सर चेहरे पर बदलते रंग और हर रंग पर बदलते चेहरे से वाकिफ रहा हूं मैं देखे हैं उनके हस्र भी…

  • महाशिवरात्रि | Poem in Hindi on Mahashivratri

    महाशिवरात्रि ( Mahashivratri )    ज्योतिर्लिंग की महिमा है न्यारी, भोले शंकर के हम हैं पुजारी। महाशिवरात्रि के महापर्व पर, जलाभिषेक की परम्परा हमारी। तन पर भस्म सुशोभित होती, गले में सर्प की माला सजती। माथे पर चंदा लगता है अच्छा, जटा से गंगा की धारा बहती। शिवलिंग पऱ बेल- पत्र चढ़ाते, केसर, धतूर, दूध…

  • दीपावली शुभकामना | Diwali shubh kamna

    दीपावली शुभकामना ( Deepawali shubh kamna )   सम्बन्धों के दीप जलाये तुमने देकर प्यार मेरे घर आँगन में करते रहे सदा उजियार !   सारे जीवन यह अपनापन बना रहे हममें दुनिया को बाँटें हम मिलकर खुशियों के उपहार !   अनजाने अनचाहे जो भी आयें अब अवरोध अपने विश्वासों से उन पर पा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *