Chhand pulkit

पुलकित | Chhand pulkit

पुलकित

( Pulkit ) 

जलहरण घनाक्षरी

 

कोना कोना पुलकित,
सौंधी चली पुरवाई,
नव पल्लव बगिया
छाई उमंगे भावन।

घट घट उल्लास हो,
महकती फुलवारी,
नजारे मनभावन,
चहक उठा सावन।

खुशहाली आनंद से,
सबकी झोली भरता,
गीत बने अधरों पे,
ईश्वर नाम पावन।

लहर लहर नदी,
सागर उमड़ा आता,
मनमोहक मुस्कान,
पुलकित रहे मन।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

माँ की ममता | Maa ki mamta par kavita

 

Similar Posts

  • स्कंदमाता | माहिया छंद

    स्कंदमाता ( Skandmata )   स्कंदमाता कल्याणी पर्वत निवासिनी रक्षा करें दुर्गा मां   गूंजता दरबार मां जयकार हो रही जले अखंड ज्योत मां   यश वैभवदात्री दो वरदान भवानी सुनो महागौरी मां   जय माता जगदंबे मां शेरावाली आओ दानव दलनी   दुर्गा माता रानी कमल नयन वाली मां जगत की करतार   तुम…

  • चिंता | Chhand chinta

    चिंता ( Chinta ) मनहरण घनाक्षरी   चिंता चिता समान है, तन का करें विनाश‌ खुशियों से झोली भरे, थोड़ा मुस्कुराइए।   छोड़ो चिंता जागो प्यारे, खुशियां खड़ी है द्वारे। हंसो हंसाओ सबको, माहौल बनाइए।   अंतर्मन जलाती है, आत्मा को ये रुलाती है। अधरो की मुस्कानों को, होंठों तक लाइए।   मत कर चिंता…

  • सूर्य अस्त होने लगा | कुण्डलिया छंद | Kundaliya chhand ka udaharan

    सूर्य अस्त होने लगा ( Surya ast hone laga )   सूर्य अस्त होने लगा, मन मे जगे श्रृंगार। अब तो सजनी आन मिल, प्रेम करे उदगार।। प्रेम करे उदगार, रात को नींद न आए। शेर हृदय की प्यास, छलक कर बाहर आए।। आ मिल ले इक बार, रात्रि जब पहुचे अर्ध्य। यौवन ऐसे खिले,…

  • जेठ की गर्मी | Chhand jeth ki garmi

    जेठ की गर्मी ( Jeth ki garmi ) मनहरण घनाक्षरी     चिलचिलाती धूप में, अंगारे बरस रहे। जेठ की दुपहरी में, बाहर ना जाइये।   गर्मी से बेहाल सब, सूरज उगले आग। तप रही धरा सारी, खुद को बचाइये।   त्राहि-त्राहि मच रही, प्रचंड गर्मी की मार। नींबू पानी शरबत, सबको पिलाइये।   ठंडी…

  • भगवान जय श्री परशुराम जी

    भगवान जय श्री परशुराम जी ( छंद-मनहरण घनाक्षरी ) जमदग्नि रेणु सूत ,अति बलशाली पूत,छठे अवतार विष्णु ,राम  कहलाए है! अक्षय तृतीया आई,अटल मुहुर्त लाई,रामभद्र जन्मोत्सव ,जगत मनाए है। राम  बसे श्वास श्वास, करने अधर्मी नाश,हाथ में सदैव अस्त्र,परशु उठाए है । शिव धनु तोड़े राम , हर्ष हुआ चारों धाम,विलोकित राम-राम ,दोनों मुस्कुराए है। डॉ कामिनी व्यास…

  • शिव | Shiva | Chhand

    शिव ( Shiva ) मनहरण घनाक्षरी   नाग वासुकी लपेटे, गले सर्प की माला है। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी, शंकर मनाइए।   डमरु कर में लिए, नटराज नृत्य करें। चंद्रमा शीश पे सोहे, हर हर गाइये।   जटा गंगधारा बहे, कैलाश पे वासा प्रभु। गोरी संग गणेश को, बारंबार ध्याइये।   त्रिपुरारी शिव भोले, शंकर दया निधान।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *