Gustakhi

गुस्ताखी | Gustakhi

गुस्ताखी

( Gustakhi ) 

 

कलियों के भीतर यूं ही , आ नही जाती महक
समूचे तने को ही , जमीं से अर्क खींचना होता है

चंद सीढ़ियों की चढ़ाई से ही, ऊंचाई नही मिलती
अनुभवों के दौर से गुजर कर ही, सीखना होता है

सहयोग के अभाव मे कभी, मंजिल नही मिलती
अकेले के दम पर ही, मुकाम हासिल नहीं होता

जरूरी है ,अपने स्वाभिमान को भी जिंदा रखना
एहतियात और के जमीर का भी,रखना चाहिए

होती हैं गुस्ताखियां भी,जाने अंजाने हर किसी से
समझकर ही हर किसी को भी,चलना चाहिए

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

सोच की संकीर्णता | Soch ki Sankirnata

 

Similar Posts

  • बोल कर तो देखो

    बोल कर तो देखो   सुनो- तुम कुछ बोल भी नहीं रहे हो यहीं तो उलझन बनी हुई है कुछ बोल कर दूर होते तो चल सकता था…..     अब बिना बोले ही हमसे दूर हो गए हो ये ही बातें तो दिमाग में घर कर बैठी है अब निकालूँ भी तो कैसे कोई…

  • राम‌ रामौ रामा

    राम‌ रामौ रामा   राम‌: रामौ रामा:, आखिरकार लौट आएंगे अयोध्याधामा, रामम् रामौ रामान्, प्रेम से कर रहे हम तेरा आह्वान, रामेन् रामाभ्याम् रामैः, राम नाम के गूंज रहे जयकारे, रामाय रामाभ्याम् रामेभ्य:, श्रीराम के होते अब किस बात है भय, रामात् रामाभ्यम् रामेभ्य:, हे मर्यादा पुरुषोत्तम! तेरी सदा है जय, रामस्य रामयो: रामानाम्, सब…

  • विद्यार्थी | Vidyarthi

    विद्यार्थी ( Vidyarthi )    तैयारियां करते रहो इम्तिहानों की दौड़ भी तो लंबी है जिंदगी की और है वक्त बहुत कम जिम्मेदारियों का साथ ही बोझ भी तो है… बिके हुए हैं पर्यवेक्षक भी तिसपर , चिट भी है और की जेब मे आपके हालात का मोल नही यहां प्रतिस्पर्धा के इस जंग मे…

  • तन्हा रात लंबी है या फिर मेरे गीत लंबे है | Tanha Raat

    तन्हा रात लंबी है या फिर मेरे गीत लंबे है ( Tanha raat lambi hai ya phir mere geet lambe hai )    तन्हा रात लंबी है या फिर मेरे गीत लंबे है। वीणावादिनी दे वरदान हमें मात अंबे है। रजनी भले काली दीप मन में जगाए हैं। शब्द मोती चुन गजरा फूलों का लाए…

  • नमन | Naman

    नमन ( Naman )   भारत की प्राचीनता ही उसकी महानता है बहुआयामी शोध मे ही उसकी परिपक्वता है चंद्रयान का चांद पर उतरना नव आरंभ है गतिशीलता इसमें पुरातन से ही प्रारंभ है.. चौदह लोकों तक भ्रमण वर्णित है शास्त्रों मे नभ से पताल तक सब अंकित है शब्दों मे यह तो नव प्रभात…

  • शान्ति दूत | Shanti doot par kavita

    शान्ति दूत ( Shanti doot )   हम है ऐसे शान्ति के दूत, माॅं भारती के सच्चे सपूत। वतन के लिए मिट जाएंगे, क्योंकि यही हमारा वजूद।।   सीमा पर करते रखवाली, सेवा निष्ठा के हम पुजारी। देश भक्त निड़र व साहसी, हर परिस्थितियों के प्रहरी।।   जीना- मरना इसी के संग, बहादूर एवं सैनिक…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *