खता | Khata

खता

( Khata ) 

 

वफादारी भी जरूरी है हर किसी के साथ
किंतु,हो उसी के साथ ,जो करे कद्र उसकी

देख लिया है ,करके भी उनकी इज्जत हमने
सिवा बदनामी के ,कुछ न मिला उनसे हमे

रिश्ता है उनका ,सिर्फ उनके मतलब भर से
उनकी फितरत ही नही, सगा होने की कभी

न समझे उन्हे ,तो ये खाता किसकी होगी
उन्होंने कहा ही कब था की यकीन करो

भोलेपन को भुनाते हैं लोग ,बड़े ही प्यार से
बेच देते हैं लोग नमक भी,शक्कर के पैक मे

जीने का हुनर भी जरूरी है जिंदगी के लिए
वरना,खेल जाते हैं लोग खेल समझकर

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

ध्यान रहे | Dhyan Rahe

Similar Posts

  • देखते है | Dekhte Hain

    ( ऐसे तो कितने ही सारे अतुल सुभाष है जिन्हें कोई जानते नहीं है, उनमें से कुछ दुनिया में आज भी मौजूद है कुछ इस दुनिया से जा चुके हैं!! ) देखते है देखते है अब कौन हो हल्ला करेगा।देखते है अब कौन कैंडल जलाएगा। निर्दोष पुरुष बेमौत मरा है यह देखो,कौन जो खिलाफ आवाज़…

  • के बी राइटर्स साहित्यिक मंच | KB Writers

    के बी राइटर्स साहित्यिक मंच ( K B Writers saahityik manch )    वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर देते आपको बधाई, साहित्यिक गतिविधियों में अद्वितीय सेवाऍं निभाई। छोटे-बड़े और नऐ कलमकारों का इसने दिल जीता, केबी राइटर्स साहित्य मंच की इस-दिन नींव लगाई।। सफ़र संघर्ष का शुरु किया था आपने ०३ वर्ष पहले, धीरे-धीरे कलमकार…

  • अक्षय तृतीया : आखा तीज

    अक्षय तृतीया : आखा तीज   अक्षय तृतीया पर्व पर इस जीवन को पावन बनाये । पापों व तापों के हैं घेरे उनको ढहाते हुए चले । संसार सागर को पार कर मोक्ष की और बढ़ते चले । उमड़ती घटाएं है यहाँ कामना की , उफनती हैं नादियाँ यहाँ वासना की , हां , भूले…

  • रश्मिरथी | Rashmirathi

    रश्मिरथी ( Rashmirathi )    देख सखी दिनकर नहीं आए आहट सुन रश्मि रथियों ने खोली द्वारा निशाचर डींग हांक रहे थे जो वह दुम दबाकर गये भाग कल की रात्रि अति काली जो अब ना दे दिखाई सोच सखी उनके आने पर क्या क्या देगा दिखाई तेज स्वरूप- सिंहासन संपूर्ण क्षितिज सुनहरी छाई निशाचर…

  • तेरी मेरी यारी | Poem teri meri yaari

    तेरी मेरी यारी ( Teri meri yaari )   होठों की हंसी मुस्कान वो खिलती प्यारी फुलवारी सावन की मस्त बहार है वो जग में तेरी मेरी यारी   विश्वास प्रेम की मूरत जहां सद्भावों की गंगा बहती आनंद हर्ष की बरसाते हर पल छाई खुशियां रहती   तेरी मेरी हर धड़कन में पहचानी जाती…

  • कुर्सी पर हक | Poem kursi par haq

    कुर्सी पर हक ( Kursi par haq )   दिल जिगर को तोल रहे, खुद को बाजीगर कहते। जनभावों संग खेल रहे हैं, मन में खोट पार्ले रहते।   वादों प्रलोभन में उलझा, खुद उल्लू सीधा करते। भ्रमित रहती जनता सारी, वो अपनी जेबें भरते।   कलाकार कलाबाजीयां, जादूगरी जिनको आती। नतमस्तक सारी दुनिया, उनकी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *