ध्यान रहे | Dhyan Rahe

ध्यान रहे

( Dhyan rahe ) 

 

गद्दार कभी

वफादार नही हो सकता

गद्दारी सिर्फ ,किसी के खून मे ही नही

बल्कि वंशानुगत भी पीढ़ी दर पीढ़ी

 चलती ही रहती है….

कहना मुनासिब तो नही

किंतु, अपराधिक मानसिकता से उत्पन्न

शिशु भी उसी का वंशधर होता है….

हर,हिरणाकश्यप के यहां

प्रह्लाद का जन्म नही होता..

सूर्पनखा की औलादों को

रामराज्य का सत्य

कभी सिरोधार्य नही होगा…

पाशविक मनोवृत्ति के भीतर

न्याय,आदर्श,मानवता आदि

को बातों का कोई औचित्य नहीं

उनकी संगत सोहबत से दूरी ही

बेहतर पर्याय सिद्ध होगी…

आप स्वतंत्र हैं

अपने जीवन के चयन मे

अतीत और वर्तमान

दोनो के ही आप दृष्टा हैं

भविष्य की दृष्टि भी

आपमें होनी चाहिए…

इतना ख्याल जरूर रहे की

पिता की वसीयत ही

पीढ़ी के लिए परिणाम बनती है….

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

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