महात्मा , बापू, राष्ट्रपिता या फिर : महात्मा गांधी

कहते हैं महान लोगों से भी कभी कभी गलतियां भी महान हीं हुआ करती हैं। ऐसे ही महान गलतियों का दंस देश आज भी भुगत रहा है। ऐसे ही महान गलतियों के पर्याय थे -राष्ट्रपिता महात्मा गांधी।

महात्मा गांधी जी के योगदान को कभी यह देश भुला नहीं सकता परंतु उन्होंने कुछ ऐसी राष्ट्रीय निर्णय लिया जिसका परिणाम देश आज भी भुगत रहा है।

इस संपूर्ण विश्व में केवल वही देश और वही धर्म जीवित रहता है जो कि साहसी ,लड़ाकू, परिश्रमी तथा सोच विचार कर निर्णय लेने वाला होता है।

यही कारण रहा है कि हमारे देश के राजाओं में शेर का शिकार करने की परम्परा रही है। इस प्रकार की परंपरा का उद्देश्य यही रहा की राजाओं का साहस और लड़ाकू स्वभाव बना रहे जिससे कि वह देश पर आए संकट का मुकाबला करने से घबराएं नहीं।

यही कारण रहा है कि जब तक इस देश में शौर्य का प्रदर्शन होता रहा कोई भी विदेशी आंख उठाकर नहीं देख सका। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए गुरु गोविंद सिंह ने भी सनातन की रक्षा के लिए सशस्त्र शस्त्र धारण करने और अत्याचारियों का विरोध करने की प्रेरणा जगाईं।

यही कारण है कि दुर्गा पूजा शस्त्र पूजा का पर्व बना। लेकिन दुर्भाग्य है कि दुर्गा पूजा में भी लोग नंगा नाच नचाने लगे हैं। दुर्गा पूजा में चाहिए कि 9 दिनों तक पूरे देश में शस्त्र संचालन का प्रशिक्षण दें। दुर्गा पूजा कोई नाच गाने का त्यौहार नहीं बल्कि राष्ट्र रक्षा का पर्व है। राष्ट्रीय सुरक्षित रहेगा तभी हम सुरक्षित रह पाएंगे।

इस देश का नुकसान सबसे ज्यादा नुक्सान अहिंसा के सिद्धांत ने किया है। इसी सिद्धांत के कारण हजारों वर्षों तक हम पिटते रहे और लोगों के हम गुलाम बने रहे।

अहिंसा के समर्थकों में तीन व्यक्तियों का नाम प्रमुखता से लिया जाता है:एक महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी और महात्मा गांधी। बौद्ध काल के पूर्व यह देश अखंड था। यही कारण है के भगवान कृष्ण ने धर्म रक्षा के लिए महाभारत जैसा भीषण युद्ध में भी प्रमुख भूमिका निभाई।

अक्सर हमें अहिंसक बनने कि सलाह दी जाती है। यह अहिंसा का सिद्धांत राष्ट्र को नपुंसक बनाकर रख दिया है।
हमारे देश की जनता अधिकांश अंध श्रद्धालु होती है।

हमारे देश में अगर कोई व्यक्ति गलत बात कहता है तो उस बात को सुनने के लिए और उस बात पर अमल करने के लिए हजारों लाखों लोग एकत्रित हो जाएंगे वह हजारों लाखों लोग अपनी व्यावहारिक बुद्धि एवं तर्क बुद्धि का प्रयोग करके उसे बात का विवेचन नहीं करेंगे बल्कि सीधे उसका समर्थन करना प्रारंभ कर देंगे।

इसी अंध श्रद्धा के कारण भारतीय समाज हजारों वर्षों तक लूटता पिटता रहा है और आगे भी रहेगा। यदि हमें अपने राष्ट्र की रक्षा तथा उन्नति करनी है तो आम जनता को जागरूक होना होगा। आम जनता को अपने आलस्य और लापरवाही का त्याग कर देना चाहिए ।

अपने कर्तव्यों का निष्ठा पूर्वक पालन करना चाहिए ।किसी भी व्यक्ति के प्रति अंध श्रद्धा नहीं रखनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति या विचार का समर्थन करने से पहले उसकी अपनी व्यावहारिक बुद्धि से विवेचन अवश्य कर लेना चाहिए। वह चाहे कितना भी बड़ा महान पुरुष क्यों ना हो?

यदि कुछ क्षण तक गांधी के अहिंसा को हम सत्य मान भी ले तो क्या करोड़ों स्वातंत्रता संग्राम की बलि बेदी पर चढ़ गए उन बलिदानियों को हम भूल सकते हैं। गांधी जी की हठधर्मिता का ही परिणाम है कि पाकिस्तान में हिंदू और सिखों के इतनी अधिक दुर्दशा हुई।

इस देश को आजादी गांधी के अहिंसा के कारण नहीं बल्कि सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचन्द्र बोस जैसे करोड़ो महान क्रांतिकारियों के कारण मिलीं।

गांधी जी के व्यक्तित्व को देखा जाए तो एक हठी प्रवृत्ति दिखलाई पड़ती है। अधिकांश वह बच्चों की भांति हठ करके अनशन पर बैठ जाते थे। ऐसा ही अंतिम अनशन स्वतंत्रता के बाद उन्होंने किया।

जिसमें भारत सरकार को मजबूर होकर पाकिस्तान को 55 करोड रुपए देने पड़े। जिसका उपयोग पाकिस्तान ने भारत पर ही उल्टा आक्रमण करके किया, गांधी जी अपनी प्रार्थना सभा में गीता के साथ कुरान की आयतें पढ़ाया करते थे । परंतु उन्होंने कभी भी मुसलमानों को गीता पढ़ने के लिए प्रेरित किया हो ऐसा सुनाई नहीं पड़ता।

इस प्रकार से हम देखते हैं कि महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्व की महान गलतियां का दंश देश आज भी भुगत रहा है।

 

लेखक : योगगुरु धर्मचंद्र

प्रज्ञा योग साधना शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान
सहसो बाई पास ( डाक घर के सामने) प्रयागराज

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