सत्यमेव जयते

सत्यमेव जयते

सत्यमेव जयते

 

 

विजय   सत्य   की  होती है,

आए कठिनाई कितनी भी।।

 

सत्य   ही   जीवन  का  सार

शक्ति       इसकी     बेशुमार

महिमा    इसकी    अपरंपार

कुंद   पङे  ना  इसकी   धार

लङ   के   हार   जाती   सब

है  यहां   बुराई   जितनी भी।

विजय    सत्य   की  होती है,

आए  कठिनाई कितनी भी।। l

 

‘राम’-‘कृष्ण’ का जीवन देखा

‘हरिश्चन्द्र’    से    भी   सीखा

‘पांचों पाण्डव’  ‘नल’ सरीखा

खींच    गए   सत्य  की  रेखा

धर्म  के  पथ  पर  अडिग रहे,

न   आन   गंवाई  इतनी  भी।

विजय   सत्य    की   होती है,

आए  कठिनाई  कितनी भी।। ll

 

सत्य  के   पथ जो भी चलता

वक़्त    भी     परीक्षा    लेता

उस  पर जो भी खरा उतरता

ईश्वर  उस   का  साथ  है देता

नाम  उसी   का  हो  जग   में

कोई  करे  बुराई  कितनी भी।

विजय   सत्य   की   होती  है,

आए  कठिनाई  कितनी भी।। lll

 

 

?

 

कवि व शायर: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

यह भी पढ़ें : 

दिल का करार ले गए है मुस्कुरा के वो

 

Similar Posts

  • हाड़ कपावै थर थर ठण्डी | Thandi

    हाड़ कपावै थर थर ठण्डी   माह दिसम्बर चहुं दिगम्बर छाया कुहरा धरती अम्बर, न आगे न पीछे सूझै काव करी कुछ मन न बूझै ठंडी कै बढ़ि गै प्रकोप बाप रे बप्पा होइ गै लोप भइल रात दिन एक समान कइसे बचै बाप रे जान ठंडी ठंडी बहय बयार बाहर निकलब भय दुस्वार हाड़…

  • बसंत ऋतु के आगमन पर | Basant Ritu par Kavita

    बसंत ऋतु के आगमन पर ( Basant ritu ke aagman par )   मदिर से है बसंत, आये हैं जी पाहुने से सखि पिया बिन मोहे, कछु न सुहावत है।। खखरा के पात उड़, उड़ आये द्वारे आज पवन के झौकन भी, जिया को जगावत है।। अमुआ के बौर वाली, वास है सुवास आली महुआ…

  • अहं का नशा

    अहं का नशा नशा मदांध कर देता हैमनुष्य जन्म का मूलउद्देश्य ही भुला देता हैजो उड़ते है अहं के आसमानों मेंज़मीं पर आने में वक़्त नही लगताहर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी मेंवक़्त गुज़रने में वक़्त नही लगता हैंनशा जहर से ज़्यादा घातक हैअहं का नशा हावी हो ही जाता हैऔर उनके विवेक पर…

  • मेरे मरने के बाद | Mere Marne ke Baad

    मेरे मरने के बाद ( Mere marne ke baad )    बैठ जाना एक ही चादर पे मेरे मरने के बाद। रख लेना तस्वीर मेरी पलायन करने के बाद। आंसुओं को थामें रखना आएंगे दुख में काम। बांट लेना तुम संपदा सारी जो भी है मेरे नाम। याद आए जब भी मेरी मेरे मरने के…

  • निष्पक्ष मतदान | Nishpaksh Matdan

    निष्पक्ष मतदान ( Nishpaksh matdan )   निर्भीक निष्पक्ष मतदान, सजग नागरिक पहचान अष्टादश वय पार हर नागरिक, अधिकृत अप्रतिम मत प्रयोग । निर्वहन अहम अनूप भूमिका, निर्मित लोकतंत्र सुखद जोग । राष्ट्र धर्म प्रतिज्ञा अनुपालन, उरस्थ चित्र समृद्ध हिंदुस्तान । निर्भीक निष्पक्ष मतदान, सजग नागरिक पहचान ।। देश सेवा तत्पर कर्तव्य निष्ठ , सुयोग्य…

  • घर | Ghar par kavita

    घर ( Ghar )   सोने बैठने रहने का ठिकाना है सबसे सुंदर आशियाना है घर।। जहां मां बाप भाई हैं बेटा बेटी और लुगाई है जहां अपने है जीवन के सपने हैं जहां हर तरह का बहाना है ऐसा ठिकाना है घर….. थक हार कर जब स्कूल से आते हैं घर पर ही आराम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *