Suma Mandal Poetry

सुमा मण्डल की कविताएं | Suma Mandal Poetry

हमें संग ले जाइए

आपसे दूर और रहा न जाए।
दर्द कितना होवे कहा न जाए।
हे दयासागर! आ जाइए।
हमको सदा के लिए संग ले जाइए।।

श्री चरणों से दूर प्रयोजन नहीं कहीं हमारा।
निष्प्राण देह यह विरह का मारा।
परमानंद की ज्योति जगाइए।
हे दयासागर! आ जाइए।
हमको सदा के लिए संग ले जाइए ।।

कितनी बहाएंगी और आंसू अंखियां।
ताना कसे दुनिया,ताना कसे सखियां।
ऐसे न और जिलाइए।
हे दयासागर! आ जाइए।
हमको सदा के लिए संग ले जाइए।।

बारम्बार विनती करूं कर जोड़।
इस भयानक रात्रि का कर दीजै भोर।
दुखिया पे तरस खाइए।
हे दयासागर! आ जाइए।
हमको सदा के लिए संग ले जाइए।।

माया की शक्ति

ठंडी हवा का झोंका हूंँ,
बहती हूँ शीतल मन्द-मन्द।
स्पर्श से मेरे,हो जाते हैं आँखें बंद।।

चंचल नदी की धारा हूंँ,
नित बहती हूँ कल-कल।
स्पर्श से हो जाती समस्याएंँ हल।।

शांत सागर का लहर हूंँ,
उफान से मचा देती भूचाल।
निकट आने वालों का हो जाता है बुरा हाल।।

नारायण की मैं माया हूँ,
नयन बाण में अदम्य है शक्ति।
मुझसे बचने के लिए मनाएँ प्रभु भक्ति ।।

त्रिभुवन में मैं राज करती हूँ।
सबको मोहने का काज करती हूंँ ।

चंचल चितवन है मेरा ।
डालती हूंँ सबपे अपना घेरा।

भ्रमित, मोहित कर रख देती हूंँ ।
व्याप नींद- चैन सब हर लेती हूंँ।

श्री हरि जी की शरण ग्रहण कीजिए।
मुझसे स्वयं को मुक्ति दीजिए।

कर ले भक्ति

पद से मिले न मेरे राम ।
प्रतिष्ठा से मिले न मेरे राम।
प्रभु तो बिके भक्ति के दाम।।

पैसे से मिले न मेरे राम।
हीरे-जवाहरात से मिले न मेरे राम।
प्रभु तो बिके भक्ति के दाम ।।

रूप से मिले न मेरे राम।
रंग से मिले न मेरे राम।
प्रभु तो बिके भक्ति के दाम।।

शक्ति से मिले न मेरे राम ।
तंदुरुस्ती से मिले न मेरे राम ।
प्रभु तो बिके भक्ति के दाम ।।

महल-इमारत बनाए से मिले न मेरे राम ।
घर-द्वार सजाए से मिले न मेरे राम।
प्रभु तो बिके भक्ति के दाम ।।

छप्पन भोग चढ़ाए से मिले न मेरे राम।
तप-योग-व्रत से मिले न मेरे राम ।
प्रभु तो बिके भक्ति के दाम ।।

कर ले तू भक्ति करने का काम।
मिलेंगे परमानंदमयी चरण धाम।
प्रभु तो बिके भक्ति के दाम ।।

पुकार सुनो मां

दुर्गा दुर्गति दूर करो।
कष्ट -कलेश मैया हरो।

शरण आपकी आए हैं हम।
हर लो माता सारे गम।
शिवप्रिया ,शिवानी हैं कहलाती।
भक्त वत्सला भक्तों को हैं सहलाती।
सुख -उल्लास से झोली भरो ।
कष्ट- कलेश मैया हरो।

गज बदन, गजानन की माता ।
दानव भय सब आपसे खाता।
कल्याणी रुद्राणी महिषासुर मर्दिनी ।
जग वंदित हैं आप भवानी ।
सकल दैत्यों पे माता टूट पड़ो ।
कष्ट -कलेश मैया हरो।

अंधकार सर्वत्र आज है फैला ।
कौन भला, जानें कैसे कौन मन मैला?
नयनों की ज्योति बनो आप।
कर रहे हैं आपका नाम का जाप।
गोद में मैया हमें धरो ।
कष्ट- कलेश मैया हरो।

Suma Mandal

रचयिता – श्रीमती सुमा मण्डल
वार्ड क्रमांक 14 पी व्ही 116
नगर पंचायत पखांजूर
जिला कांकेर छत्तीसगढ़

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