लक्ष्य

लक्ष्य

लक्ष्य

 

है दुनिया में ऐसा कौन?

जिसका कोई लक्ष्य न हो।

 

तृण वटवृक्ष सिकोया

धरा धरणीपुत्र गगन हो।

 

प्रकृति सभी को संजोया

कण तन मन और धन हो।

 

खग जल दिवा-रजनी बाल

वृद्ध जन व पवन हो।। है दुनिया ०

 

सब संसाधन यहीं हैं,सही है,

कहां दौड़ते ऐ विकल मन है।

 

समय संसाधन स्वस्थ चित

ऐ साधक!यही तुम्हारे धन हैं।

 

शिथिल न पड़े लक्ष्य भेद तिमिर में,

हम सब के आशीष वचन हैं।

 

जग के महान जन के कथन यहीं हैं,

तुम्हारी ऐसी चितवन हो।। है दुनिया ०

 

स्थिर करो अपनी नज़र को

अर्जुन सम लक्ष्य पाने को।

 

उठो ऐ कुम्भकर्णों देखो लक्ष्मण

धनुर्धर जगा है लक्ष्य पाने को।

 

दृष्टिपात करो वज्रपात पर

मेघ वध मेधा लक्ष्य पाने को।

 

समय बोध रहे, लक्ष्य सामने रहे,

चेतना में हो या सपन हो। है दुनिया ०

 

 

?

लेखक: राम बरन सिंह ‘रवि’ (प्रधानाचार्य)

राजकीय इंटर कालेज सुरवां माण्डा

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :

सड़क

Similar Posts

  • मुहब्बत बस हमारे गांव में | Ghazal

    मुहब्बत बस हमारे गांव में ( Muhabbat bas hamare gaon mein )     बारिशों के है इशारे गांव में देखो  टूटे है किनारे गांव में   वरना देखी है नगर में नफ़रतें है मुहब्बत बस हमारे गांव में   जो किसी भी शहर होते नहीं वो हसीं देखें नजारे गांव में   देखने को…

  • शिक्षक दिवस | Kavita Shikshak Divas

    शिक्षक दिवस ( Shikshak divas ) ( 2 )  शिक्षक देता है सदा सबको ज्ञान। शिक्षक सदा ही रखता सबका ध्यान।। शिक्षक है जीवन में ऐसे जैसे कुम्हार। शिक्षक सदा ही करें जीवन उद्धार।। शिक्षक के सदा ही रहते कर्जदार। शिक्षक सदा ही होते ईमानदार।। शिक्षक करता चमन गुलजार। अच्छे गुरु का जीवन में रहता…

  • सुनो लड़कियों | Hindi Poem Suno Ladkiyon

    सुनो लड़कियों ( Suno ladkiyon )   हम मध्यम वर्गीय परिवार की लड़कियां नहीं भर सकती ऊचाईयों तक उड़ान अपनी इनके कांधे का वजह भारी होता है   क्यूंकि इन्हें लेकर चलना पड़ता है लड़की होने की मर्यादा रिश्तों और समाज के तानों बानों का बोझ   मगर हारती नहीं निरंतर जारी रखती हैं प्रयास…

  • गुरु नानक देव | Guru Nanak dev ji poem in Hindi

    गुरु नानक देव ( Guru Nanak Dev )   सिख धर्म के संस्थापक प्यारे गुरु नानक देव हमारे। प्रकाश पर्व जयंती मनाये गुरु ज्ञान आलोकित तारे।   धर्म सुधारक समाज सुधारक योगी धर्मगुरु कहलाए। दार्शनिक गुण धर मन मानस देशभक्ति राह अपनाए।   वाहे गुरुजी का दरबार सजता गुरुद्वारे गूंजे कीर्तन कर। धर्म की रक्षा…

  • अस्तित्व की लड़ाई | Astitva kavita

    अस्तित्व की लड़ाई ( Astitva ki ladai ) ***** सूखी टहनियों सा मैं हो गया हूं नाज़ुक हल्का और कमजोर ज्यादा ना लगाओ तुम मुझ पर अपना ज़ोर टूट जाऊंगा बन तिनका बिखर जाऊंगा तेरे किसी काम अब न आ पाऊंगा सिवाए जलावन के ले आओ माचिस और मटिया तेल खत्म कर दो सारा यह…

  • सीता स्वयंवर | Kavita sita swayamvar

    सीता स्वयंवर ( Sita swayamvar )   सीता स्वयंवर रचा जनक ने धनुष यज्ञ करवाया। भव्य पावन था अनुष्ठान महारथियों को बुलवाया‌   दूर-दूर के राजा आए अब भाग्य आजमाने सभी। बली महाबली हर कोई बाणासुर आए रावण तभी।   विश्वामित्र महामुनि ज्ञानी पधारे जनक पुरी धाम। गुरु संग हर्षित होकर तब आए लक्ष्मण श्रीराम।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *