Dosti ke Naam

दोस्ती के नाम | Dosti ke Naam

दोस्ती के नाम

( Dosti ke Naam ) 

 

संग फिजा के दोस्ती की महक भेजना
सर पर हमेशा मुश्किल में हाथ रखना

डूबते सूरज के हाथ थोड़ी रोशनी भेजना,
संग चांद के थोड़ी चांदनी भेजना…

कड़कती धूप में
पेड़ की छाया बनना
बरसती बरसात में
तुम छत्री कहलाना

यह दोस्ती के हर वादे को निभाना
करीब आए हो दिल के
अब दूरियां का गम खत्म कर देना

जिंदगी सताये
गर आये आंखों में आँसू
मुझे याद करना
मुझे तुम बुलाना

ऐ दोस्त
यादों के खजाने को सजाना
बस तोहफे में तुम दोस्ती को निभाना

 

नौशाबा जिलानी सुरिया
महाराष्ट्र, सिंदी (रे)

यह भी पढ़ें :-

कीमती | Kimti

Similar Posts

  • माँ पर नरेन्द्र सोनकर की ४ कविताएँ

    माॅं कभी दगा नहीं देती जन्म देती है शिक्षा-संस्कार देती है लाड़-प्यार देती है आचार-विचार देती है रूप-आकार देती है पुष्टाहार देती है घर-परिवार देती है माॅं संसार देती है दुश्चरित होने पर भी लगा लेती है ऑंचल से हमें भगा नहीं देती माॅं कभी दगा नहीं देती मालती देवी ( जिस कोख से मैंने…

  • छोटी दीपावली | Chhoti Dipawali

    छोटी दीपावली ( Chhoti Dipawali )    सुमंगलता सरित प्रवाह,छोटी दीपावली पर्व पर छोटी दिवाली अद्भुत अनुपम, जनमानस अलौकिकता स्पंदन । रूप,नरक चतुर्दशी अन्य उपमा, सर्वत्र देवत्व स्तुति अभिवंदन । महालक्ष्मी अभिषेक पूर्व बेला, सत्य सौंदर्य शोभना गर्व कर । सुमंगलता सरित प्रवाह, छोटी दीपावली पर्व पर ।। भगवान श्री कृष्ण कर कमल, दैत्यराज नरकासुर…

  • अद्भुत है रुद्राक्ष | Rudraksh

    अद्भुत है रुद्राक्ष ( Adbhut hai rudraksh ) भगवान शंकर के अश्रुओं से हुई जिसकी उत्पति, असरदार और अद्भुत लाभ अचूक जिनमें शक्ति। हिंदूधर्म में पूज्य और पवित्र जिसको माना जाता, कलाई कंठ हृदय पर धारण करके करते भक्ति।। पौराणिक मान्यता से जिसे रूद्र-अक्ष कहा जाता, जो एक मुखी से चौदह मुखी का रुद्राक्ष है…

  • महफिल | Mehfil

    महफिल ( Mehfil )   महफिले आम न कर चाहत मे अपनी लुटेरों की बस्ती मे न बसा घर अपना बच के रह जरा ,बेरुखी जहां की नजर से इस महफिल का उजाला भी शराबी है घरौंदे से महल के ख्वाब ,ठीक नही होते दीए का उजाला भी ,भोर से कम नहीं होता ये महफिल…

  • घड़ी | Bal kavita

    घड़ी ( Ghadi )   टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती इसके भीतर अलग-अलग तीन छड़ी घूमतीं सेकेंड, मिनट, घंटे से जो समय तोलतीं टिक टिक टिक कर यह घड़ी बोलती । बच्चों झटपट हो जाओ तुम सब तैयार मात-पिता, बड़ों को करो नमस्कार जल्दी पहुँचो स्कूल-तुमसे ये घड़ी बोलती शिक्षा ही सबकी उन्नति…

  • मचल गया दूल्हा फिर आज | Dulha par kavita

    मचल गया दूल्हा फिर आज ( Machal gaya dulha phir aaj )    बहुत बताया नही माना दुल्हा, सबके सब सोच रहें क्या होगा। बोला गाड़ी मुझे दहेज में लेना, नही तो बारात अकेला जायेंगा।।   जैसे करके मोटरसाइकिल वे लाऐ, गहना घरवाली का वह बेच आऐ। अब तो लो फेरे आप कॅवर साहब, क्यों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *