जागल बिहारी : निकलल नेताजी के होशियारी

जागल बिहारी : निकलल नेताजी के होशियारी

जागल बिहारी : निकलल नेताजी के होशियारी

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बिहार के जनता-

भूल गईल बा मंदिर मस्जिद,

आ भूल गईल बा जाति मजहब;

भैया हो ! अबकी चुनाव में-

बिहारी कइले बा गजब!

जनता के मांग अबकी नेता के नइखे पचत,

जेने जाईं ओन्ने बेरोजगार बाड़े पूछत।

कहां बा# रोजगार?

हे सरकार!

वोटवा लेवे खातिर बानी बेकरार।

रोजगार देम की ना ?

कोई दस लाख त# कोई उनइस र#ट#तारे,

दिनहीं नेताजी तारा देख#ता#रे!

अब दसे ( १०.११.२०) के देखल जाई

के बावे बीस;

जनता जनार्दन-

निकाल#तारन केकरा पर खीस।

धकाधक प्रचार होता,

बाकी जैसे जैसे समय नजदीकाता;

नेताजी के जिया धकधकाता।

का होई?

कुर्सी रही की जाई?

बिहारी जनता अबकी झांसा में ना आई।

बिहार आ बिहारी हमेशा-

देश के दिशा देले बा!

अबकीयो दी,

केतना नेता लोग बोरिया बिस्तर समेट ली!

जात पात , मंदिर मस्जिद छोड़ मांगता-

कल-कारखाना आ रोजगार,

दादा हो दादा !

अबके त# जागल बा# बिहार।

अबकी मुद्दा –

गरीबी , बेरोजगारी, भूखमरी, लाचार, बीमारी, सड़क, अस्पताल पर ले आईल बा,

जेही आवता उनके से पूछ#ता!

दे#ब# शिक्षा, रोजगार?

ना#त # मुश्किल बा#अबकी सरकार!

शिक्षा चाहीं, भिक्षा ना#!

पढ़ लेम त अधिकार छीन लेम,

रोटी कपड़ा के जोगार कर लेम।

लेकिन शिक्षा चाहीं,

भेकेंसी आवे के चाहीं?

हमनी के कंपीटिशन में रिकार्ड बा।

देश विदेश में डंका बजाइला,

कल-कारखाना इंहवा नइखे एहीसे मार खाइला;

ना त आइएएस पीसीएस त चुटकी में पास हो जाइला।

बिहारी अबकी जाग रहल बा#,

नेता से अधिकार आपन मांग रहल बा#।

जुमला फेंके वाला भाग रहल बा#,

युवा पीछे से चहेंट रहल बा#।

ई मैसेज देश दुनिया में जाए के चाहीं,

चुनाव में जुमला ना !

काम के लिस्ट देखे के चाहीं,

जनता दे रहल बा नेताजी के चाभी।

बिहारी जनता के किस्मत अबकी बा जागी!

देखीं अबकी के आव#ता आ के भागी।

नेता लोग के आ रहल बा आंधी,

गांवे गांवे घूम ता#रे बन के गांधी।

जय बिहार,

जय बिहार की जनता,

देखा# देले बा#र# अबकी आपन क्षमता!

डटल रह# ,

रोजगार पर अटल रह#।

देश के बा नज़र बिहारी पर,

फेरू मर मिटी दुनिया-

हमनी के होशियारी पर।

 

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नवाब मंजूर

 

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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