हसीन सपने

Hasya Kavita in hindi | हसीन सपने

हसीन सपने

( Haseen sapne )

 

बैठे थे हम महफिल में, हसीनो के बीच,
बालों को रंगवा कर।
और हरकत थी कुछ
ऐसे जैसे 60 में से 40 घटा कर।
महफिल भी जवां और दिल भी जवां।
मन में सावन ऐसे झूम रहा था,
जैसे आवारा, बादल चूम रहा था।
हमने भी, हमने भी, हसीना की जुल्फें लहराने चाही,
हमने भी हसीना की जुल्फें लहरानी चाही।
बेवक्त
तुरंत 40 में 20 जोड़कर घुटने कहराने लगे।
फिर क्या था जनाब,
रंगीन मौसम बुढ़ापे में तब्दील हो गया और
हसीन सपना चूर-चूर हो गया।

☘️

लेखिका :- गीता पति ‌(प्रिया)

( दिल्ली )

यह भी पढ़ें :

Geet | रंग गालो पे कत्थई लगाना

 

Similar Posts

  • जन्मदिन हो मुबारक लालू जी | Happy Birthday Lalu Ji

    जन्मदिन हो मुबारक लालू जी ( Janamdin ho mubarak laloo ji )   दबे -कुचलों के लिए काम करते हैं लालू, इसी काम के लिए जाने जाते हैं लालू। जितना दबाते हैं उनके विरोधी मित्र, उतना ही उभरकर वो चमकते हैं लालू। टूटे सपनों को वो जोड़ते आए सदा से, सुनहरे सपनों की उड़ान भरते…

  • बागबा | Bagba

    बागबा ( Bagba )    तुम तो बागबा थे तुम्हारे खिलाए हुए फूल,आज भी किए हैं गुलजार गुलशन को…. आप अपने ही लगाए कांटों की बाड़ मे कर लिए पैर जख्मी कसूर तो आप ही का था.. बदलेगी न जब तक मानसिकता आपकी संभव होगी न उन्नति कभी टटोलते हो गैर की कमियों को भूल…

  • मुहब्बत | Muhabbat Shayari Hindi

    मुहब्बत ( Muhabbat )    जाति , धर्म , मजहब का बहाना अच्छा नहीं लगता। प्यार में गुणा, भाग,जोड़, घटाना अच्छा नहीं लगता।। जीत का जज्बा लेकर कितने हारे मैदान ए मुहब्बत में, वरना किसी जंग में हार जाना अच्छा नहीं लगता।। मुश्किलें हमसफ़र हो जाती हैं राह ए मुहब्बत में यहाँ, वरना किसी मुसाफिर…

  • बड़ी महंगाई बा | कजरी

    बड़ी महंगाई बा (कजरी)   जान मारत बा ढेर महंगाई पिया बचे ना कमाई पिया ना …… बड़ी मुश्किल बा जिंदगी बिताई पिया बड़ी महंगाई पिया ना…. जितना सैया हो कमाए उतना खर्चा होई जाए बचे नाही रुपया अढ़ाई पिया बड़ी महंगाई पिया ना….1 महंगा होईगा धनिया मर्चा बढ़िगा तेल जीरा खर्चा जान मारे सब्जी…

  • शेखर की कविताएं | Shekhar Hindi Poetry

    पृथ्वी आज रोती पृथ्वी आज रोती करती हमसे विनती मत कर मेरा दोहन मैं हूं तेरा संजीवन पेड़-पौधे हैं मेरे वास मत कर इसका उपहास हिमनद हैं मेरी संरचना कर तू इसकी  अर्चना मत कर तू अबीर लगा एक पेड़ जरूर देर सबेर,देर सबेर टेर पर टेर,टेर पर टेर धरा का मैं नीला सागर धरा…

  • शिक्षक होता युग निर्माता | Shikshak par Kavita

    शिक्षक होता युग निर्माता ( Shikshak hota yug nirmata )    शिक्षक ही होता युग निर्माता, आदर्शों का वह पाठ पढ़ाता। वो मर्यादा, संस्कार सिखाता, भविष्य की बुनियाद ‌बनाता।। अज्ञानता से सबको उबारता, सद्गुणों का संदेश वह देता। अंधेरे से उजाला वो दिखाता, आध्यात्मिकता ज्ञान बताता।। सभी बच्चों का ध्यान रखता, बुद्धिमान व गुणवान बनाता।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *