ट्वीटर की धृष्टता
ट्वीटर की धृष्टता

ट्वीटर की धृष्टता

*****

ट्वीटर वालों ने
हमारे देश की आजादी,
संप्रभुता, उदारता
से खिलवाड़ किया है
धृष्टता की है,मूर्खता की है
इतना ही नहीं तकनीकी खामी बता-
आरोपों से बचने की कोशिश की है।
हमारी संप्रभुता से खिलवाड़ किया है,
जम्मू एवं कश्मीर को-
चीन में दिखाने का दुस्साहस किया है;
लद्दाख को-
जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बताया है।
जबकि लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश है, जिसकी राजधानी अब लेह है।
नागरिकों ने इसका कड़ा विरोध किया है,
लेकिन ट्वीटर ने हल्के में लिया है।
तकनीकी खराबी का हवाला हैं दिया ,
बचकाना सा जवाब है दिया।
भारत सरकार के आईटी सचिव ने संज्ञान लिया ,
लेकिन तीन दिनों के बाद;
पता नहीं देरी क्यों किया?
कोई कंपनी कश्मीर को रिपब्लिक ऑफ चाइना का हिस्सा कैसे दिखा रही है?
क्या उसे भारत के इतिहास भूगोल का ज्ञान नहीं है?
कौन लोग उसे चला रहे हैं?
जिन्हें तनिक भी ज्ञान नहीं है,
या जानबूझकर ऐसा कर रही है?
नागरिकों के विरोध का भी परवाह नहीं है!
हमारा सरकार से सवाल है?
अभी तक यह कंपनी भारत में क्यों है?
सरकार को इसका जवाब देना चाहिए,
ऐसी कंपनियों को मार भगाना चाहिए।
आखिर एक कंपनी ने भारत की संप्रभुता को तार तार किया है,
सरकार ने क्यों इसे बर्दाश्त किया है?
अविलंब प्रतिबंधित करना चाहिए!
ताकि दूसरे कंपनियों को भी सबक मिले,
फिर कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।
जिसकी हिमाकत स्वयं चीन नहीं कर सकता
उसे कैसे एक कंपनी कर सकती है?
यह चिंतनीय है,
निंदनीय है।
हल्के में नहीं लेना चाहिए,
नागरिकों को शिकायत का मौका नहीं मिलना चाहिए।
सरकार यह देखे,
ऐसी कंपनियों को अपने फंदे में लपेटे।
ट्विटर यही हिमाकत चीन/अमेरिका में कर सकता है क्या?
नहीं न?
तो फिर भारत में क्यों?
विदेशी कंपनियों को भारत की उदारता
का अनुचित लाभ नहीं लेना चाहिए,
एक सीमा में रहकर ही काम करना चाहिए।
हमारी खुफिया और आईटी एजेंसियों को सतर्क रहना चाहिए,
कंपनियों को उनके हद में रखना चाहिए।
आज सूचना क्रांति और सूचना युद्ध का है दौर ,
इस युद्ध में भी हमें रहना होगा सिरमौर।
पिछड़ना भारी भूल होगी,
आगे चुनौती बड़ी होगी।
यह हम-सब का दायित्व है,कर्त्तव्य है
साइबर संसार में हार न मानें
वरना असली संसार में मुसीबतें
और बढ़ जायेंगी
बढ़ती चली जाएंगी
फिर परिश्रम समझो व्यर्थ है!

 

🍁

नवाब मंजूर

 

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

अनोखा फैसला

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here