बचपन लौटा दो

बचपन लौटा दो | Kavita Bachpan lauta do

बचपन लौटा दो

( Bachpan lauta do )

मुझे मेरा
बचपन
लौटा दो,
बालपन
का पौधा
महका दो,
आंगन की
किलकारियां
गुनगुना दो,
दादी की
पराती
सुना दो,
मां का
आंचल
ओढ़ा दो,
पापा के
खिलौने
ला दो,
बैग का
बोझ
घटा दो,
कागज
का नाव
तैरा दो,
कान्वेंट से
गुरुकुल
पहुंचा दो ।
एकलव्य
आरुणी सा
शिष्य बना दो ।

Shekhar Kumar Srivastava

शेखर कुमार श्रीवास्तव
दरभंगा( बिहार)

यह भी पढ़ें :- 

हम हुए अस्त | Hum Huye Ast

Similar Posts

  • देश हमारा | Desh Hamara

    देश हमारा ( Desh Hamara )    वीरों की पावन भूमि है देश हमारा । पृथ्वी पे सबसे प्यारी जमीं है देश हमारा ।। संसाधनों से भरा-पूरा है देश हमारा । प्राकृतिक सौंदर्य से भरा है देश हमारा ।। अनेकता में एकता लिए है देश हमारा । अनेक कलाओं का संग्रह है देश हमारा ।।…

  • भाई बहन का प्यार | Bhai Bahan ka Pyar

    भाई बहन का प्यार ( Bhai bahan ka pyar )    तुम हो मेरे प्यारे भइया, मैं तेरी प्यारी बहना। बहन को अपनी भूल न जाना, ओ मेरे प्यारे भइया। न मांगू मैं धन और दौलत, न ही एक रुपया। मेरे लिए राखी का मतलब, प्यार है मेरे भइया। तुम हो मेरे प्यारे भइया…. हर…

  • दोहा सप्तक | Doha Saptak

    दोहा सप्तक ( Doha Saptak )   एक भयावह दौर से,गुजर रहा संसार। इक दूजे की मदद से,होगा बेड़ा पार। मानवता की सेवा में,तत्पर हैं जो लोग। दुआ कीजिए वे सदा,हरदम रहें निरोग। बेशक अवसर ढूंढिए,है यह विपदा काल। सौदा मगर ज़मीर का,करें नहीं हर हाल। सॉंसों के व्यापार में,जो हैं दोषी सिद्ध। पायें फॉंसी…

  • वो बचपन के दिन | Bachpan par kavita

    °°° वो बचपन के दिन °°° ( Wo bachpan ke din )   कहाँ गए बचपन के, सुनहरे प्यारे “वो” दिन || 1. कुछ पल ही सही,पर हम भी कभी,साहूकारों मे आते थे | जब -तब हमनें बाजी मारी,तब नगर सेठ कहलाते थे | कुछ पल के लिए ,कुछ क्षण के लिए,दरबार हमारा लगता था…

  • परम हितकारी है करेला | Karela

    परम हितकारी है करेला ( Param hitkari hai karela )    परम हितकारी एवं औषधीय गुणों का है यह भण्डार, जिसका नियमित-सेवन पेट रोगों में करता है सुधार। ये मधुमेह के रोगियों के लिए जो है औषधि रामबाण, इन हरि सब्जियों में मानों जैसे ये सबका है सरदार।। कड़वा होने पर भी बहुत लोग इसको…

  • परिकल्पना | Kavita parikalpana

    परिकल्पना ( Parikalpana )   बाइस  में  योगी आए हैं, चौबीस में मोदी आएगे। भारत फिर हो विश्व गुरू,हम ऐसा अलख जगाएगे।   सदियों की अभिलाषा हैं, हर मन में दीप जगाएगे, हूंक नही हुंकार लिए हम, भगवा ध्वज लहराएगे।   सुप्त हो रहे हिन्दू मन में, फिर से रिद्धम जगाएगे। जाति पंथ का भेद…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *