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गुरु पूर्णिमा व 265 वाँ तेरापंथ स्थापना दिवस

गुरु पूर्णिमा व 265 वाँ तेरापंथ स्थापना दिवस

गुरु पूर्णिमा व 265 वाँ तेरापंथ स्थापना दिवस –
गुरु पूर्णिमा व 265 वें तेरापंथ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मेरी भावपूर्ण -विनयांजलि …..

हम अपना कल्याण कर लें ।
जीवन का लक्ष्य महान बना लें ।
आत्मा की ज्योति जला लें ।
तप गंगा में स्नान कर लें ।
जीवन को अम्लान बना लें ।
आत्मा के “प्रदीप “ जला ले ।
हमको जो मिला यह तन नश्वर है ।
आत्मा के सिवाय कोई ना अपना हैं ।
इस जग की माया सबकुछ झूठी हैं ।
झूठा यह सपना हैं ।
भव भंजन भगवत शरणं हैं ।
पल – पल प्रतिपल मंगल करणं हैं ।
चातुर्मास में धर्म ध्यान से लाभ उठाना हैं ।
जीवन बहती हुई सरिता हैं ।
इसके सुख – दुःख दो छोर हैं ।
हर स्थिति में आत्मा को सम रखना हैं ।
आत्मा की उज्ज्वलता की उजली भोर हैं ।
मोक्ष की राह सर्वश्रेष्ठ है ।
सत्य की पहचान करनी हैं ।
चातुर्मास में मन को एकाग्र करना हैं ।
साँसो की लड़ियां टूट रही हैं ।
जीवन की घड़ियां बित रही हैं ।
मूर्च्छा से हमको उठना हैं ।
साधु – साध्वी के दर्शन सेवा का लाभ उठाना हैं ।
जीवन के स्वर्णिम प्रभात को उदित करना हैं ।
आत्मा को कर्मों से हल्का कर ज्ञान जगाना हैं ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

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