Bachkar rahana

बचकर रहना | Bachkar Rahana

बचकर रहना

( Bachkar rahana )

 

फ़िज़ा की हवाओं में
जहर है घुला हुआ
सांस भी लेना तो संभलकर
फिसलन भरे हैं रास्ते
कदम भी रखना तो संभलकर

नीयत मे इंसानियत है मरी हुयी
जबान पर शराफत है मगर
मुश्किल है किसी पर यकीन करना
चाहते हो यदि बचकर रहना, तब
रिश्ते में बंधना तो संभलकर

बूंद भर भी नहीं भीतर
स्वाभिमान मगर हिमालय है
अपने अहम को रखना बचाकर
आवेश मे आना भी तो संभलकर

उन्हे फिक्र नहीं उनकी
उठाए जा चुके हैं महफ़िल से कई
तुम्हें तो पता है कीमत तुम्हारी
देना हि पड़े जवाब तो संभलकर

कीमत नहीं वक्त या जबान की उनके
पता है तुम्हे अहमियत तुम्हारी
लगानी होगी कीमत तुम्हे खुद ही अपनी
खड़े हो अगर बाजार मे तो संभलकर

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

अटल नियम | Atal Niyam

Similar Posts

  • राजा रंक सभी फल ढोते | Kavita Raja Runk

    राजा रंक सभी फल ढ़ोते ( Raja runk sabhi phal dhote )    राजा रंक सभी फल ढ़ोते,  होता कर्ज़ चुकाना।  कर्मों के अनुसार जीव को, पड़े दंड भुगताना।। मानव दानव पशु पक्षी बन,  इस धरती पर आता।  सत पथ गामी मंच दिया है,  बिरला नर तर पाता। कोई जीवन सफल बनाता,  ले जाता नजराना।…

  • हमारी बिटिया | Kavita hamari bitiya

    हमारी बिटिया ( Hamari bitiya )   पुष्प में मकरंद जैसे सूर्य की किरण जैसे चहकती चिड़ियों जैसे गुलाब की सुगंध जैसे स्वच्छ निर्मल जल जैसे स्थिर वृक्ष पर्वतों जैसे हवा के उन्मुक्त वेग जैसे दीप की ज्योति जैसे बज रहे हो नूपुर जैसे ऐसी थी हमारी बिटिया जज्ब किए जज्बात कैसे मूक बनी रही…

  • उमंग | Kavita Umang

    उमंग ( Umang ) भारतवर्ष हमारा है विकसित, सभ्यता,संन्कृति भी है उन्नत, षटॠतुऔं का होता आवाजाही हर ॠतु में आते पर्व,वर्चस्व,माही।। फाल्गुन पूर्णिमा में होली तौहार रंग,गुलाल का बासंती विहार, नाना उमंग का होता आप्लावन नई नवेली बधु के लिए,रास,धन।। संयोगी के लिए खास है परव, नानाविध पकवान का लुत्फ, इष्ट,मित्र मंड़ल संग होली,राम उमंग…

  • हमनवा | Humnava par kavita

    हमनवा (  Humnava )   तुम प्रेरणा हो मेरी मैं संगिनी तुम्हारी तुम प्रियवर हो मेरे मैं प्रियतमा तुम्हारी तुम कविता हो मेरी मैं कलम तुम्हारी तुम श्रंगार हो मेरे मैं संगिनी तुम्हारी तुम जीवन हो मेरे मैं धड़कन तुम्हारी तुम प्राणश्वर हो मेरे मैं दामिनी तुम्हारी तुम मनमोहन हो मेरे मैं मोहिनी तुम्हारी तुम…

  • ज्ञान का दीप जलाते शिक्षक | Shikshak ke Upar Kavita

    ज्ञान का दीप जलाते शिक्षक ( GYan ka deep jalate shikshak )    उनकी महिमा का वर्णन मैं कैसे करूं, ज्ञान की रोशनी जिनसे मुझको मिली, जब कभी लड़खड़ाएं है मेरे कदम, सीख से उनकी हिम्मत है मुझको मिली । अपने ज्ञान की पावन गंगा से, सबको शीतल कर देते शिक्षक। जीवन की अंधेरी राहों…

  • अनटोल्ड स्टोरी | Untold Story

    अनटोल्ड स्टोरी ( Untold story )    ओ मेरा सब कुछ;मैं उसकी अनटोल्ड स्टोरी अचानक मेरी जिंदगी में एक शख़्स आता है जो मेरा दोस्त भी नही,हम सफर भी नहीं,लेकिन मुझे बहुत भाता है कुछ तो है दरमियां हमारे जिससे बंधी है हम दोनों के बीच बंधन की डोरी ओ मेरा सब कुछ; मैं उसकी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *