करगिल जंग | Kavita Kargil Jung

करगिल जंग

( Kargil Jung )

युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में,
बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे।
टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों,
फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे।

एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं,
अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे रणबाँकुरे।
घायल-घाटी के चेहरे से व्यथित थे वो फौजी,
दुश्मन के कलेजे को फाड़ रहे थे रणबाँकुरे।

उनकी बर्बरता की सीढ़ी जला रहे थे गोली से,
उस सेना की रसद को काट रहे थे रणबाँकुरे।
हौसले बुलंद थे हमारी नभ,थल, जल सेना के,
दुश्मन को धूल वो चटा रहे थे रणबाँकुरे।

दाल गल न पाई उस करगिल की समर में,
शेर के जैसे सभी दहाड़ रहे थे रणबाँकुरे।
इंच -इंच जमीन पर बहाये खून की नदी,
तिरंगे की आन को बचा रहे थे रणबाँकुरे।

धन्य हैं वो माँयें जिसने इनको पिलाया दूध,
लाशों की सीढ़ी पर चढ़ रहे थे रणबाँकुरे।
सूरज -चाँद जैसी अमर रहेगी कीर्ति उनकी,
सरफ़रोशी की तमन्ना दिखा रहे थे रणबाँकुरे।

!!…..जय हिन्द…..!! !!जय हिन्द की सेना!!

Ramakesh

रामकेश एम.यादव

(रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक),

मुंबई

यह भी पढ़ें :-

रामकेश एम. यादव की कविताएं | Ramkesh M. Yadav Hindi Poetry

 

Similar Posts

  • गणतंत्र दिवस हमारा | Ganatantra divas kavita

    गणतंत्र दिवस हमारा ( Ganatantra divas hamara )     देश भक्ति में झूमे सारे, मनाए उत्सव मिलकर। गणतंत्र दिवस हमारा, मुस्काए हम खिलकर।   हाथों में तिरंगा लेकर, गीत वतन के गाए। आओ आज मिलकर, महोत्सव हम मनाएं।   सीमा पर अटल सेनानी, वंदे मातरम गा रहे। राष्ट्रप्रेम की ज्योत जला, देशप्रेम जगा रहे।…

  • आओ हम दिवाली मनाएं

    आओ हम दिवाली मनाएं आओ हम-सब साथ मनाएं दीवाली त्यौंहार,तमस की उमस दूर करें जलाएं दीप अपार।जगमग कर दे घर ऑंगन हो समृद्धि बौछार,सुखमय हो सबका जीवन महकें द्वार-द्वार।। इसदिन ही संपूर्ण हुआ श्री राम का वनवास,सीता-राम और लखन पधारे अपने निवास।झिलमिल करते दीप-जलाएं पर्व बना ख़ास,तब से चली आ रही परंपरा कार्तिक-मास।। इस अमावश…

  • तू ही खुशियों का खजाना | Kavita Tu hi

    तू ही खुशियों का खजाना ( Tu hi khushiyon ka khajana )    मन मोहक मुस्कान तेरी हर लेती है व्यथा मेरी। तू ही खुशियों का खजाना शरण आया प्रभु तेरी। हे ईश्वर तू अंतर्यामी तू रखवाला तू ही है स्वामी। घट घटवासी लखदातार सबके रक्षक सृजनहार। सारी सृष्टि के संचालक है परमेश्वर तुम हो…

  • चाॅंद पर उतरा विज्ञान | Chand Par Utra Vigyan

    चाॅंद पर उतरा विज्ञान ( Chand par utra vigyan )    आज हमारे हिन्दुस्तान ने इतिहास ऐसा ये रच दिया, अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर चन्द्रयान लैंडिंग कर दिया। टिकी हुई थी विश्व की नज़रें इस दिन चंद्र के सामने, हमनें भी फिर क़लम उठाकर रचना एक रच दिया।। इसरो के वैज्ञानिकों ने ये नामुमकिन कार्य…

  • मन का विश्वास | Kavita man ka vishwas

    मन का विश्वास (  Man ka vishwas )   बवाल बड़ा होता बोले तो हंगामा खडा हो जाता सहता रहा दर्द ए दिल को कब वक्त बदल जाता   वो मुश्किलें आंधियां रोकना चाहे मेरे होसलो को अल मस्त रहा मै सदा खुद को बुलंदियों पे पाता   अड़चनो को रास ना आया राहों पे…

  • मुक्तक | Muktak

    मुक्तक ( Muktak )   1 सच जो लिख न सके वो कलम तोड़ दो, ये सियासत का  अपने  भरम  तोड़ दो, इन गुनाहों   के  तुम  भी  गुनहगार  हो, यार सत्ता  न  संभले  तो  दम  तोड दो।। 2 भटक रहा हूँ मैं अपनी तिश्नगी के लिए.. ज़रूरी हो गया तू मेरी जिन्दगी के लिए.. फक़त…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *