वात्सल्य की प्रतिमूर्ति-हिन्दी

वात्सल्य की प्रतिमूर्ति-हिन्दी

मेरी हिन्दी, प्यारी हिन्दी।
सब की है दुलारी हिन्दी।

सब भाषायें दुनिया भर की,
हुई समाहित हिन्दी में।
पर संस्कृत है रही प्रमुख ही,
अपनी प्यारी हिन्दी में।

महावीर हरिश्चन्द्र आदि ने,
समय समय पर अपने ढंग से,
खूब संवारी अपनी हिन्दी।
हर भाषा से प्यारी हिन्दी।

बोलें हिन्दी में जब भी हम,
मन मिश्री घुल जाती।
मां सम लोकाचार सिखाती,
अनुपम नेह लुटाती।

अपने में सहजता समेटे,
जन-जन से जब जुड़ती है,
देश समेकित कर धड़कन में,
बसती नित्य हमारी हिन्दी।

संस्कृत की सबसे प्रिय बेटी,
नहीं किसी से द्वेष करे।
आलिंगन कर भुजा उठाये,
स्वागत सस्नेह विशेष करे।

ज्येष्ठा बन निज देवरानी को,
कर आरती गेह में लाकर,
भुज भर, कर सत्कार, सुझाती
लोकरीति संस्कारी हिन्दी।

हमें जान से प्यारी हिन्दी।
जग में है उजियारी हिन्दी।

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • मोबाइल- hindi kavita

    मोबाइल   –>मोबाइल से क्या सही,क्या गलत हो रहा है || 1.नहीं था बड़ा सुकून था, दोस्त परिवार के लिये समय था | दिल मे चैन दिमाक शांत, सुखी संसार के लिये समय था | न जाने क्या भूचाल सा आया, समय लापता सा हो गया | आज हर इंसान व्यस्त है, बस मोबाइल सब…

  • मुकेश बिस्सा की कविताएं | Mukesh Bissa Hindi Poetry

    दास्तान किसी मोड़ पर ठहरी हुई,वक्त की एक पुरानी पहचान,धूल जमी सी यादों में छुपी,दिल की वो अधूरी दास्तान। कभी हँसी की छांव में पली,कभी आँसुओं में भीगी रात,कभी खामोश लम्हों ने लिखा,कभी बोल उठे जज़्बात। राहों ने जो मोड़ लिए,कदम भी साथ बहकते गए,कुछ चेहरे धुंधले हो गए,कुछ दिल में ही बसते गए। हर…

  • रक्तदान महादान | Poem in Hindi on Raktdan

    रक्तदान महादान ( Raktdan mahadan )   आज सभी लोग करों रक्त का दान, इससे बड़ा नही कोई भी महा दान। आज बचावोगे आप कोई भी जान, कल वो बचाएगा तुम्हारी भी जान।। एक-एक करके ही बनता है अनेंक, ये रक्त दान करना होता बहुत नेक। चाहें हारी बीमारी दुःख व तकलीफ, सड़क हादसा चाहे…

  • लड़ाई लंबी है | Poem in Hindi on Ghaza War

    लड़ाई लंबी है ! ( Ladai lambi hai )    हुई मानवता तार-तार,लड़ाई लंबी है, नाच रही है मौत, लड़ाई लंबी है। एटम-बम बना खिलौना कुछ लोगों का, द्वार चक्रव्यूह तोड़,लड़ाई लंबी है। नभ,जल,थल से न बरसेंगे फूल कोई, लहू से सने हैं हाथ,, लड़ाई लंबी है। महंगाई,बेकारी पर किसी का ध्यान नहीं, बदलेगा भूगोल,लड़ाई…

  • कुम्हार | Kumhar kavita

    कुम्हार ( Kumhar )   बाबू ले लो ना दिए घर तेरा रोशन हो जाएगा। एक वक्त की रोटी के लिए मेरा चूल्हा भी जल जाएगा। मेरी भूख तब मिटेगी जब तेरा हर कोना जगमग आएगा। ले लो ना बाबू जी कुछ दिए मेरा चूल्हा भी जल जाएगा। छोटे बड़े दीपक से अंधकार मिट जाएगा…

  • किताब | Kitab par kavita

    किताब ( Kitab )   ज्ञान सिंधु में गोते लगा लो पुस्तकों  से  प्यार  करो आखर आखर मोती महके मन में जरा विचार करो   ज्ञान विज्ञान सारा समाया तजो क्रोध लोभ मोह माया त्याग तपस्या पराक्रम भारी वीरों की गाथा को पाया   साधु संतों मुनियों ने लिखी वैद्य वकील वैज्ञानिक ने कहीं इंजीनियर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *