ए ज़िन्दगी! | Aye Zindagi
ए ज़िन्दगी!
( Aye Zindagi )
उसे
चुन
लिया
जिसे
चाहा
नहीं
था
कभी…..
मुझे
मुआफ़
कर
ए ज़िन्दगी!

डॉ जसप्रीत कौर फ़लक
( लुधियाना )

( Aye Zindagi )
उसे
चुन
लिया
जिसे
चाहा
नहीं
था
कभी…..
मुझे
मुआफ़
कर
ए ज़िन्दगी!

डॉ जसप्रीत कौर फ़लक
( लुधियाना )

हर युग में चलते चलीं कविता हर युग मेंचलते चलीं कवितालोग क्या कहेंगेयह नहीं सोचतीं कभीहाशिए पर फेंक दिए घटक को प्राथमिक स्थान दिलाती कवितामेघों को अपना दूत बनाकरभावों को व्यक्त करतें कालीदासरामायण के रचयितावाल्मिकीहो या राम के दास तुलसीदासलहर लहर पर लहरातेकामायनी लिखते जयशंकर प्रसादमैं अकेलामैं अकेला…गाते हुए निराले से निरालादुख की बदलीअधूनिक मीरा…

उलझन ( Uljhan ) मचा हुआ है द्वंद हृदय में, कैसे इसको समझाए। यायावर सा भटक रहा मन, मंजिल तक कैसे जाए। उलझी है जीवन हाथों की,टेढी मेढी रेखाओ में। एक सुलझ न पायी अब तक,दूजी कैसे सुलझाए। वो मुझको चाहत से देखे, पर मन मेरे और कोई। मेरे मन मे रमा…

ऐ जिंदगी ( Ai zindagi ) ऐ जिंदगी… कुछ देर ठहर जा बैठ जा कुछ कह जा कुछ सुन जा वक्त का तकाज़ा है कभी तू गुम है कभी मैं… हाँफती भागती सी तुझे छूने की होड़ में थकी मांदी सी सुस्ताने के बहाने ढूँढ तलाशती तुझको ही बोझिल कमज़ोर नज़रें मेरी ऐ…

प्यार जिंदगी है ( Pyar zindagi hai ) परखते भी तो क्या परखते तुमको हैसियत और काबिलियत तुम्हारी।। दुनिया की तराजू में रख कर कभी किसी के प्रेम को तोला नहीं जाता।। तुमसे मिले तो जाना प्यार जिंदगी है अनुभव हुआ सुहाना तुमसे मिलकर , प्यार जिंदगी है, तुम प्रेम हो हमारी यह हर…

करवा चौथ ( Hindi poem On karwa chauth ) चाँद का कर लूं सनम दीदार मैं प्यार से जो बंधा करवा चौथ है उसकी चूड़ी उसकी देखो बिंदिया मुस्कुराती सूरत करवा चौथ है हो गया दीदार अपनें चाँद का प्यार का आया वो करवा चौथ है सज गयी है चाँद की …

ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम ( पूर्णिका ) ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम चर्चा फिर भी फूल की।इसी बात पर और कंटीली काया हुई बबूल की। जुड़ने वाले हाथ कटे हैं झुकने वाला सिर गिरवीऐसा लगता है मैंने मंदिर में आकर भूल की। रोज़ खुली रामायण पढ़ते पढ़ते जाते छोड़ पिताबड़े प्रेम से हवा बिछा…

Dr. Jaspreet Kaur “Falak” ji ka ‘ Andaaj e bayan ‘ sabse juda sa hai.Dil ki gehrai se unhone lafjon ko chua toh hai.
Navin Sharma ‘tanha’. Ludhiana.