Pyar Ki ye Ajab Reet Hai

प्यार की ये अजब रीत है | Pyar Ki ye Ajab Reet Hai

प्यार की ये अजब रीत है

( Pyar Ki ye Ajab Reet Hai )

प्यार की ये अजब रीत है।
हार में भी छुपी जीत है।।

किससे शिकवा करें हम कहो,
पास में जब नहीं मीत है।।

धूप के साथ है छांव भी,
ज़िन्दगी ऐसा ही गीत है।।

दूर होकर लगे पास वो,
हां यही सच कहूं प्रीत है।।

कोई ममता है दिल में बसा,
साज़ बिन बजता संगीत है।।

डॉ ममता सिंह
मुरादाबाद

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • यार तू हँसना हसाना छोड़ दे

    यार तू हँसना हसाना छोड़ दे यार तू हँसना हसाना छोड़ देलोगो की बातों में आना छोड़ दे इस तरह तू मुस्कराना छोड़ देगम को अपने तू छुपाना छोड़ दे अब न राधा और मीरा है कोईश्याम तू बंशी बजाना छोड़ दे प्यार भी ये इक बला है मान करगीत उल्फ़त के सुनाना छोड़ दे…

  • ग़ज़ल गुनगुना दीजिए

    ग़ज़ल गुनगुना दीजिए साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिएशामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँनाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हमसाक़िया आज जी भर पिला दीजिए इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह के दिलफ़ासला आज हर इक मिटा दीजिए कर रही हैं बहारें…

  • मज़ा आ गया | Mazaa aa Gaya

    मज़ा आ गया ( Mazaa aa Gaya )  था तो मुश्किल सफ़र पर मज़ा आ गया इक मुसाफ़िर गया दूसरा आ गया इक मुलाकात उस से हुई थी कहीं मेरे घर वो पता पूछता आ गया उसके आते ही लगने लगा है मुझे वक़्त दर पर मेरे ख़ुशनुमा आ गया लुत्फ़ ही लुत्फ़ आने लगा…

  • अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं

    अश्क़ भी वो गिराने लगते हैं अश्क़ भी वो गिराने लगते हैंदूर जब भी हम जाने लगते हैं बातों में मुस्कराने लगते हैंहम उन्हीं के दीवाने लगते हैं जब कभी मिलते हैं सनम मुझसेतो अदा से रिझाने लगते हैं बात जिस दिन भी हो जाये उनसेदिन वही बस सुहाने लगते हैं याद आती है जब…

  • शबाब आया नया – नया है

    शबाब आया नया – नया है शबाब आया नया -नया हैसुरूर गहरा नया- नया है करें गिले किस तरह बताओबना ये रिश्ता नया -नया है कहें तुझे कैसे अलविदा हमअभी नजारा नया- नया है पिला दे उल्फ़त के जाम साकीहुआ दिवाना नया -नया है भडक रहे हैं जिगर में शोलेउठा ये पर्दा नया- नया है…

  • मोबाइल से | Mobile se

    मोबाइल से सारे रिश्ते ख़तम मोबाइल से,अच्छेअच्छे भसम मोबाइल से । देश भर के शरीफ़ज़ादे सब ,हो गयें बेशरम मोबाइल से । नाचती हैं हसीन बालाएं,बन गया घर हरम मोबाइल से। बैठ दिल्ली में बात गोवा की,खायें झूठी कसम मोबाइल से। भागवत आरती भजन कीर्तन,डीजिटल है धरम मोबाइल से । चिट्ठियों का गया ज़माना अब,भेजती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *