Mazaa aa Gaya

मज़ा आ गया | Mazaa aa Gaya

मज़ा आ गया

( Mazaa aa Gaya ) 

था तो मुश्किल सफ़र पर मज़ा आ गया
इक मुसाफ़िर गया दूसरा आ गया

इक मुलाकात उस से हुई थी कहीं
मेरे घर वो पता पूछता आ गया

उसके आते ही लगने लगा है मुझे
वक़्त दर पर मेरे ख़ुशनुमा आ गया

लुत्फ़ ही लुत्फ़ आने लगा ज़ीस्त में
साथ जब से कोई हमनवा आ गया

मेरी तक़दीर कितनी बुलंदी पे है
ढूँढता ख़ुद मुझे रहनुमा आ गया

डस रही थी जुदाई सर-ए-शाम से
हाय सुन कर मेरी आशना आ गया

जब भी उलझन सताती है साग़र मुझे
काम उसका सदा मशवरा आ गया

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
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