पास बैठो

पास बैठो | Paas Baitho

पास बैठो

( Paas Baitho )

पास बैठो दो घड़ी मेरे सनम
गर न बैठे तो तुम्हें दूंगी कसम

जिंदगी में मौज ही सबकुछ नहीं
ध्येय को भी सामने रखना बलम

खुद के पैरों पर ही चलना ताकि ये
कह सको इस जग को हैं खुद्दार हम

मुस्कुराकर प्रेम से हर फ़र्ज़ को
गर निभाओगे सफल होगा जनम

राक्षसों को चीरते हैं भारतीय
थे व हैं नरसिंह के अवतार हम

चंद लोगों को मिली है ये सजा
हाथ में ही फट गये मैसेज बम

कुमार अहमदाबादी

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