To Aur Kya Karte

तो और क्या करते | To Aur Kya Karte

तो और क्या करते

( To Aur Kya Karte )

वो अपना ग़म न छिपाते तो और क्या करते
नज़र न अपनी झुकाते तो और क्या करते

अज़ल से दुश्मनी पाले थे यार हमसे वो
हमारा दिल न जलाते तो और क्या करते

रवानी चाहती है ज़िंदगी हमारी भी
क़दम अगर न बढ़ाते तो और क्या करते

क़ज़ा जो आई थी अपने तो साथ लेने को
न हाथ उससे मिलाते तो और क्या करते

भड़क रही थी जो आतिश यहाँ पे नफ़रत की
अगर न उसको बुझाते तो और क्या करते

हुए थे ख़्वाब हमारे सभी मुकम्मल यूँ
हिना को गर न रचाते तो और क्या करते

ज़मीर बेचना आता न था तो इस दिल को
कि खाली हाथ न आते तो और क्या करते

नये क़लम से लिखी थी नई ग़ज़ल मीना
सुनाने उनको न जाते तो और क्या करते

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • ऐ मुहब्बत | Ghazal Aye Muhabbat

    ऐ मुहब्बत ( Aye Muhabbat ) ऐ मुहब्बत ! तिरा जवाब नहीं , तुमने किसको किया खराब नहीं ! हिज़्र, ऑंसू, फ़रेब, मक़्क़ारी, तुझमें शामिल है क्या अज़ाब नहीं ! तेरे कूंचे में ऐ मुहब्बत सुन, खार ही खार हैं गुलाब नहीं । एक धोखा है तेरी रानाई, अस्ल में तुझमें आबो ताब नहीं ।…

  • उनका किरदार | Unka Kirdar

    उनका किरदार ( Unka kirdar ) उनका किरदार है क्या उनको बताया जाये आइना अहले -सियासत को दिखाया जाये जलने वालों को ज़रा और जलाया जाये ख़ाली बोतल ही सही जश्न मनाया जाये ज़ुल्म ही ज़ुल्म किये जाता है ज़ालिम हम पर अब किसी तौर सितमगर को डराया जाये इस ग़रीबी से बहरहाल निपटने के…

  • प्यार करने की ज़माने से इजाज़त ली है

    प्यार करने की ज़माने से इजाज़त ली है प्यार करने की ज़माने से इजाज़त ली हैहमने ख़ुद मोल बिना बात ही आफ़त ली है है मुनासिब कहाँ हर रोज़ बहाना आँसूहमने कुछ दिन के लिए ग़म से रिआयत ली है मुफ़लिसों का नहीं कोई भी सगा दुनिया मेंसारी दुनिया ने ग़रीबों से अदावत ली है…

  • एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna

    एक दिलदार अपना ( Ek Dildar Apna ) रखा है सहेजे हुए प्यार अपनाक़िताबों में गुल एक दिलदार अपना मुहब्बत कसौटी पे बिल्कुल ख़री हैतभी तो जताया है अधिकार अपना सनम देवता मैंने माना तुम्हीं कोकरो तुम भी इक रोज़ इज़हार अपना फ़लाने की बेटी सगी से भी बढ़करजो अस्मत लुटी दिल है बेज़ार अपना…

  • 2 Line Ghazal in Hindi | देख चुका हूँ

    देख चुका हूँ ( Dekh chuka hoon )   ख्वाबों से हकीकत का सफर देख चुका हूँ I अब वक़्त का बेवक़्त कहर देख चुका हूँ II सब आब की किस्मत में कहाँ होता समंदर I दम तोड़ती दरिया ,वो नहर देख चुका हूँII आब-ए-हयात दौर में विष का ये समंदर I अँधा वकील-ए-गूंग नगर…

  • तारीफ़ तेरे हुस्न की | Tarif Tere Husn ki

    तारीफ़ तेरे हुस्न की ( Tarif Tere Husn ki ) तारीफ़ तेरे हुस्न की हर शाम करेंगेमहबूब तेरे इश्क़ में हम नाम करेंगे डरते न ज़माने से हुकूमत हो किसी कीइज़हार ए मुहब्बत भी सरे-आम करेंगे जो मोम था पत्थर हुआ दिलदार भी लेकिनखुद क़त्ल भी हों उसको न बदनाम करेंगे ऊँचा हो भले दाम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *