Iss Ishq Ka

इस इश्क़ का | Iss Ishq Ka

इस इश्क़ का

( Iss Ishq Ka )

इस इश्क़ का कोई भी फ़साना तो है नहीं
और गर हो कोई हमको सुनाना तो है नहीं

पैग़ाम मिलता ही नहीं हमको ख़ुशी का यूँ
और ग़म मिले हैं कितने गिनाना तो है नहीं

इस ज़िंदगी ने साथ हमारा नहीं दिया
हम मुफ़लिसों का कोई ठिकाना तो है नहीं

अशआर इस ग़ज़ल के नगीने से कम कहाँ
लेकिन कोई भी इसका दिवाना तो है नहीं

कोई न रहनुमा है कहें अपना हम जिसे
और ज़ीस्त का सफ़र भी सुहाना तो है नहीं

आएँगें आप लौट के सुनते ही ये ख़बर
होशोहवास खोये जताना तो है नहीं

ख़ुद बन सके न वो तो मसीहा भी अपने आप
हमको ख़ुदा भी उनको बनाना तो है नहीं

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • बेवफ़ाई किसी ने | Bewafai Ghazal

    बेवफ़ाई किसी ने ( Bewafai kisi ne )   बिगाड़ी किसी ने बनाई किसी ने कभी दिल्लगी कब निभाई किसी ने। फिज़ा में उदासी घुली आज़ क्यूं है कहीं की है फ़िर बेवफ़ाई किसी ने। अगर तल्ख़ियां हों रखो फ़ासले तुम मुझे बात ये थी सिखाई किसी ने। मुझे भूल कर ख़ुश नहीं संगदिल वो…

  • तूफान उठाया है | Toofan Utha Hai

    तूफान उठाया है ( Toofan Utha Hai ) इस दिल के समुंदर में तूफान उठाया हैमासूम निगाहों ने जब तीर चलाया है वो दिल के दरीचों से नज़दीक लगा इतनाइक पल में उसे हमने हमराज़ बनाया है ताउम्र रहे रौशन दहलीज़ तेरे घर कीयह दीप मुहब्बत का यूँ हमने जलाया है तुमने जो किया दिल…

  • धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की

    धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की।खिल उठी हर कली मुह़ब्बत की। शम्अ़ नफ़रत की बुझ गई फ़ौरन।बाद जब भी चली मुह़ब्बत की। उड़ गए होश सब रक़ीबों के।बात ऐसी उड़ी मुह़ब्बत की। बाद मुद्दत के आज देखी है।उनके रुख़ पर हंसी मुह़ब्बत की। लाख शोअ़ले उठे बग़ावत के।पर न सूखी नदी…

  • मिलके दीवाली मनायेंगे | Diwali ke Upar Shayari

    मिलके दीवाली मनायेंगे ( Milke diwali manayenge )    उसे घर आज अपने ही बुलायेंगे उसे ही खीर उल्फ़त की खिलायेंगे बढ़ेगा प्यार दीवाली से हर दिल में सभी के साथ में दीपक जलायेंगे मिटेंगे सब अंधेरे नफ़रतों के ही मुहब्बत के यहाँ दीप झिलमिलायेंगे ढलेंगे दिन वतन से ही गमों के सब ख़ुशी हर…

  • सीखी है अय्यारी क्या

    सीखी है अय्यारी क्या सीखी है अय्यारी क्याइस में है फ़नकारी क्या सब से पंगा लेते होअ़क्ल गई है मारी क्या ऐंठे-ऐंठे फिरते होशायर हो दरबारी क्या लगते हो भारी-भरकमनौकर हो सरकारी क्या जाने की जल्दी में होकरली सब तय्यारी क्या तोपें खींचे फिरते होकरनी है बमबारी क्या सबको धोखा देते होअच्छी है मक्कारी क्या…

  • हर लम्हा है हसीन | Ghazal Har Lamha

    मेरी ग़ज़ल ( Meri Ghazal ) मिलती सभी से मेरी ग़ज़ल दिलकशी के साथ शीरीं ज़ुबां है उसकी बड़ी चासनी के साथ हम जीते ज़िंदगी को हैं दरियादिली के साथ हर लम्हा है हसीन फ़क़त मैकशी के साथ बातें करेंगे वस्ल की और इंतिज़ार की इक़रार-ए-इश्क़ की सदा संजीदगी के साथ बीती सुख़नवरी में ही…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *