नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) तृतीय दिवस

नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) तृतीय दिवस

नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) तृतीय दिवस

भुवाल माता पर श्रद्धा में जीवन का सार हैं ।
द्वेष को हटाकर आत्मा निर्मल बनने का सार हैं ।
चिन्तन बनता स्वस्थ जब आस्था पाती है विस्तार ।
भुवाल माता पर श्रद्धा में जीवन का सार हैं ।
राग – द्वेष हम कम करे यह है भीतर की आवाज
आत्मा तेजस्वी जब बने गिरती तृष्णा पर गाज ।
भुवाल माता पर श्रद्धा में जीवन का सार हैं ।
शम समता की रश्मियां फैलाती प्रखर प्रकाश
समता के अभ्यास से बनता संयत हर श्वास ।
भुवाल माता पर श्रद्धा में जीवन का सार हैं ।
सुख दुख , लाभालाभ , प्रिय अप्रिय का हो न प्रभाव
ऐसे भाव प्रवाह से भरते अनन्त के घाव ।
भुवाल माता पर श्रद्धा में जीवन का सार हैं ।
निश दिन मन की भावना में हो सम का उच्चार ,
समरसता तुझको करेगी भव सागर से पार ।
भुवाल माता पर श्रद्धा में जीवन का सार हैं ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • वंदन माता शारदे

    वंदन माता शारदे प्रफुल्ल ज्ञानरूपिणी, प्रवीण मातु शारदे।विधायिनी सुवादिनी, सरस्वती उबार दे।। निरंजना प्रभामयी, महाश्रया सुवासिनी।सुपूजितां महाभुजा, मनोरमा सुभाषिनी।।करें प्रणाम श्रीप्रदा, प्रबुद्ध भारती सदा।उतारते प्रियंवदा, सुजान आरती सदा।।सुबोध माँ प्रशासनी, सुभक्ति माँ अपार दे। अकूत शास्त्ररूपिणी, करो कृपा महाफला।अनंत प्रेम दायिनी, सुहासिनी महाबला।।नमो दयालु शारदे, स्वयंप्रभा दिवाकरी।प्रशस्त मातु पंथ भी,सुखारिणी सु-अंबरी।।पयोधि ज्ञान दायिनी, नमामि माँ…

  • मेरा प्यार | Kavita Mera Pyar

    मेरा प्यार  ( Mera Pyar ) दिल है सुंदर मन है सुंदर। और तुम भी हो सुंदर। दिलकी बातें कह नहीं पाती। पर मन के भाव दिखती हो।। करते हो यदि प्यार तुम तो आँखो से कह दो। प्यार तुम्हारा छुप न रहा। अब तो तुम कुछ कह दो।। मन तेरा अब भटक रहा है।…

  • मेघ | Kavita Megh

    मेघ ( Megh ) मेघ तुम इतना भी ना इतराना जल्दी से तुम पावस ले आना बारिश की बूंद कब पड़ेंगी मुख पर, तुम मेघ अमृत को जल्दी बरसाना ।। तरस रहे सभी प्राणी ये जग जीवन करते हैं तुम्हारा मिलकर अभिनंदन आजाओ हम बाट निहारें कब से मेघ मल्हार राग भी तुमसे ही सारे…

  • महिलाएं | Mahilayen

    महिलाएं ( Mahilayen )   महिलाएं एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं महिलाएं कभी ना थकती हैं कभी ना रूकती है ना जाने कैसे रहती हैं महिलाएं आधी आबादी कहलाती हैं महिलाएं माथे पर शिकन तक नहीं आने देती फिर भी रहती हैं शिकार शोषण का यौन अपराधों का जैसे उस पराशक्ति ने इन्हें…

  • स्वच्छता पखवाड़ा | Swachhta Pakhwada

    स्वच्छता पखवाड़ा ( Swachhta pakhwada )   दरिद्रता मिलकर दूर भगाये चलो हम वतन को स्वच्छ बनायें कोई भी बीमारी घर न करेगी धन वैभव से लक्ष्मी घर को भरेगी घर घर सफाई हम सब करायें चलो हम वतन को स्वच्छ बनायें खुद को बड़ा न दूजे कह पायें हमारे वतन के सभी गुण गायें…

  • हां नारी हूं मैं | Nari Poem

    हां नारी हूं मैं ( Haan naari hoon main )    पग पग संभल रही , कहा किसी परिस्थिति से हारी हूं मैं निकाल लेती मार्ग खुद अपना हां नारी हूं मैं । मन विचलित होता तो , मोन हो सफर करती तय मैं अपना कहा जिमेदारि से किसी हारी हूं हां नारी हूं मैं!…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *