श्रीगंगा-स्तुति

नमामि गंगे | Namami Gange

नमामि गंगे

( Namami Gange )

नमामि गंगे , नमामि गंगे ।
हर हर गंगे , हर हर गंगे ।
आओ गंगा में, डुबकी लगायें ।
तन और मन , को शुद्ध बनायें ।
गंगाजल की ,यह शीतलता ।
करती दूर ,ह्रदय की मलिनता ।
आओ शुद्ध करें ,इस जल को ।
कैसे भी बस , स्वच्छ यह जल हो ।
जय हो तुम्हारी , गंगा मैय्या ।
पार लगा दो , सबकी नैय्या ।
गंगा जी में , एक स्नान ।
कर देता हर , मन को शांत ।
जो भी हैं , जीवन से हारे ।
जाते वो , गंगा के किनारे ।
गंगा जी , उन्हें देतीं सहारे ।
गंगा मैय्या , जय हो तुम्हारी ।
तुम हो मां ,समान हमारी ।

गंगा जी की , जय-जयकार ।
पार लगा दो, अबकी बार ।
नमामि गंगे, नमामि गंगे ।
हर हर गंगे , हर हर गंगे ।

Pragati Dutt

श्रीमती प्रगति दत्त
अलीगढ़ उत्तर प्रदेश

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