तुम साधना हो

तुम साधना हो

तुम साधना हो

तुम ईश्वर की अनुपम संचेतना हो
रचित ह्दय प्रेम की गूढ़ संवेदना हो
क्या कहा जाए अद्भुत सौन्दर्य वाली
तुम सृष्टि की साकार हुई साधना हो ।

घुँघराले केश, मृगनयनी, तेज मस्तक
अंग सब सुअंग लगें यौवन दे दस्तक।
ठुड्डी और कनपटी बीच चमके कपोल
कवि सहज अनुभूति की तुम पालना हो ।

तुझसे जुड़कर कान की बाली इतराए
अधर लाली लाल देख गुलाब शरमाए
स्वर्गलोक से आई तुम हो सुन्दर परी
धरा पर सौन्दर्य की प्रबल भावना हो ।

तुम्हारे मन से निकलता सुन्दर सुविचार ,
देश-परदेश तक पहुँचा आचार विचार ।
प्रेम जिसकी तुम होगी, वो होगा धन्य,
मनहर स्वप्न की आलौकिक कल्पना हो ।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • मेरा गांव | Mera Gaon

    मेरा गांव ( Mera Gaon ) सबका दुलारा मेरा गांव ।सबका प्यारा मेरा गांव ।थका हारा जब भी आऊं ।मुझको सहारा देता गांव । कितने ही देखे इसने बसंत ।ना था जिनका कोई अंत ।सबकी पीड़ा छुपाए सीने में ।सब पे प्यार लुटाता मेरा गांव । पीपल बरगद पहचान है इसकी ।कुआं बावड़ी सब जान…

  • सोच की संकीर्णता | Soch ki Sankirnata

    सोच की संकीर्णता ( Soch ki sankirnata )    पानी है अगर मंजिल तुम्हे, तो कुछ फैसले कठोर भी लेने होंगे जिंदगी की हर ऊंचाई का पैमाना निश्चित नही होता.. कभी कभी सोच की संकीर्णता स्वयं की प्रतिभा को ही निखरने नही देता…. बढ़ाएं तो आएंगी ही कभी अपने से कभी अपनों से और कभी…

  • अस्तित्व | Astitv

    अस्तित्व ( Astitv )    समाज ही होने लगे जब संस्कार विहीन तब सभ्यता की बातें रह जाती हैं कल्पना मात्र ही सत्य दब जाता है झूठ के बोझ तले अवरुद्ध हो जाते हैं सफलता के मार्ग चल उठता है सिर्फ दोषा रोपण का क्रम एक दूसरे के प्रति मर जाती है भावनाएं आपसी खत्म…

  • बोलचाल भी बंद | Kavita Bolachaal hi Band

    बोलचाल भी बंद ( Bolachaal hi Band ) करें मरम्मत कब तलक, आखिर यूं हर बार। निकल रही है रोज ही, घर में नई दरार।। आई कहां से सोचिए, ये उल्टी तहजीब। भाई से भाई भिड़े, जो थे कभी करीब।। रिश्ते सारे मर गए, जिंदा हैं बस लोग। फैला हर परिवार में, सौरभ कैसा रोग।।…

  • आया बुढ़ापा ले मनमानी | Aaya Budhapa

    आया बुढ़ापा ले मनमानी ( Aaya budhapa le manmani )    बचपन बीता गई जवानी आया बुढ़ापा ले मनमानी। ना रही वो चुस्ती फुर्ती सारी बीती बातें हुई कहानी। मंद पड़ी नैनों की ज्योति श्वेत केश जर्जर हुई काया। बच्चे बड़े हुए पढ़ लिखके सबको घेर चुकी है माया। अकेले अकेले कोने में बैठा काशीराम…

  • राखी का पर्व | Rakhi ka Parv

    राखी का पर्व ( Rakhi ka parv )    आया है आज राखी का त्योहार उमड़ रहा है भाई बहन का प्यार खुशियों संग झूम रही रिश्ते की डोर भाई बहन की नोंक झोंक है चहुंओर बहाना बांधे राखी भाई के हांथ बदले मांगे जीवन भर का साथ बहना के खातिर भाई है शेर के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *