तमन्न-ए-क़ल्ब

तमन्न-ए-क़ल्ब | Tamanna-e-Qalb

तमन्न-ए-क़ल्ब

( Tamanna-e-Qalb )

हर तमन्न-ए-क़ल्ब मर जाए।
वो अगर अ़ह्द से मुकर जाए।

और भी आब-जू निखर जाए।
वो अगर झील में उतर जाए।

वो अगर देख ले नज़र भर कर।
सूरत-ए-आईना संवर जाए।

क्या करें जान ही नहीं जाती।
जान जाए तो दर्द-ए-सर जाए।

जेब ख़ाली है ह़ाल बोसीदा
ऐसी ह़ालत में कौन घर जाए।

हाथ रख दे जो,वो मुह़ब्बत से।
दर्द कैसा भी हो ठहर जाए।

हाय क्या हो गया फ़राज़ इसको।
उसकी जानिब ही ये नज़र जाए।

मुझको इतना फ़राज़ बतला दे।
कैसे उन तक मिरी ख़बर जाए।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • हम हैं | Ghazal Hum Hain

    हम हैं ( Hum Hain ) नज़र शल है,जिगर ज़ख़्मी है फिर भी ख़ंदाज़न हम हैं। न जाने किस लिए उनकी मुह़ब्बत में मगन हम हैं। हमारे नाम से मनसूब है हर एक जंग-ए-ह़क़। मिसालें जिनकी क़ायम हैं वही लख़्त-ए-ह़सन हम हैं। तनाफ़ुर के अंधेरों को मिटाने की ख़ता क्या की। फ़क़त इस जुर्म पर…

  • आज फिर ग़मज़दा हो गया | Gamazada Shayari

    आज फिर ग़मज़दा हो गया ( Aaj Phir Gamazada ho Gaya )   यार भी बेवफ़ा हो गया देखलो वो जुदा हो गया चाहते थे जिसे हम बहुत शख्स मुझसे ख़फ़ा हो गया आज यूं हो गया ज़ीस्त से साथ मेरे दग़ा हो गया अश्क़ छलके मेरी आंख से यार जब तू जुदा हो गया…

  • करवाचौथ का | Karwa Chauth Ka

    करवाचौथ का दिख रहा दीवाना जन-जन तुमको करवा चौथ काभरना होगा आज दामन तुमको. करवा चौथ का हाथ खाली आ गये लाये नहीं उपहार कुछध्यान तो रखना था साजन तुमको करवा चौथ का कर दिया क्या क्या निछावर मैंने तुम पर प्यार सेयाद दिलवायेगा दर्पन तुमको करवा चौथ का प्यार से पानी पिलाना खोलूँगी उपवास…

  • ताजदार करना है

    ताजदार करना है वफ़ा की राह को यूँ ख़ुशग़वार करना हैज़माने भर में तुझे ताजदार करना है भरम भी प्यार का दिल में शुमार करना हैसफ़ेद झूठ पे यूँ ऐतबार करना है बदल बदल के वो यूँ पैरहन निकलते हैंकिसी तरह से हमारा शिकार करना है ये बार बार न करिये भी बात जाने कीअभी…

  • एक ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल | वो चाहता तो

    वो चाहता तो तसकीन उसके दिल को मिलती मुझे रुलाकेपूरी जो कर न पाऊं फरमाइशें बताके। वो चाहता तो चाहे कब उसको है मनाहीदिक्कत वो चाहता है ले जाना दिल चुरा के। मंजिल जुदा जुदा है जब उसकी और मेरीतब दिल का हाल उसको क्या फायदा सुना के। कहता है उंसियत में इज़हार है ज़रूरीरूठा…

  • किसको दिल की पीर सुनाएं

    किसको दिल की पीर सुनाएं एक ख़ता की लाख सज़ाएं।किसको दिल की पीर सुनाएं। कोई नहीं इब्न-ए-मरियम सा।ज़ख़्म जिगर के किसको दिखाएं। जान ही जाते हैं जग वाले।राज़-ए-मुह़ब्बत कैसे छुपाएं। नफ़रत के सहरा में आओ।उल्फ़त के कुछ फूल खिलाएं। ख़ाली से बेगार भली है।मुफ़्त न अपना वक़्त गंवाएं। क़रिया-क़रिया पेड़ लगा कर।आबो-हवा को मस्त बनाएं।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *