Bas Aaj

बस आज बस | Bas Aaj

बस आज बस

( Bas aaj bas ) 

 

जद्दोजहद दुश्वारियां कुछ कश्मकश बस आज बस
मैं गुनगुनाना चाहती बजने दो कोई साज़ बस।

वो फ़िक्र रंजो गम ज़फा तन्हाइयों की बात को
तुम छोड़ दो जो हैं ख़फा रहने दो अब नाराज़ बस।

हो गुफ्तगू तो बात कुछ लग जाती है उनको बुरी
हमने भी चुप्पी ओढ़ ली आए हुए हैं बाज़ बस।

कुछ मर्सरत कुछ दिलकशी रंगीनियों की बात हो
भौंरे जरा अब तितलियों के देख लें अंदाज़ बस।

खुद को कहे खालिक हमेशा बात करते दीन की
बर वक़्त ऐ मालिक यहां खुलने दो उनके राज़ बस।

आवाम की चिंता न मतलब मुल्क के हालात से
कीमत हो कोई अब सियासत में ज़रूरी ताज बस।

कितने निभाये फर्ज़ लेकिन हो रही अब तो थकन
हक़ भी ज़रूरी है नयन कब तक उठायें नाज़ बस।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

खालिक- ईश्वर सृष्टि रचयिता
सियासत –राजनीति
मसर्रत –खुशी उल्लास

यह भी पढ़ें :-

बेवफ़ाई किसलिए | Bewafai Shayari

Similar Posts

  • मेरे ख़ुलूस को | Mere Khuloos ko

    मेरे ख़ुलूस को मेरे ख़ुलूस को चाहो अगर हवा देनामेरे ख़िलाफ़ कोई वाक्या सुना देना कभी तो आके मेरी ख़्वाहिशें जगा देनावफ़ा शियार हूँ तुम भी मुझे वफ़ा देना तमाम उम्र ये मंज़र रहेगा आँखों मेंनज़र मिलाते ही तेरा ये मुस्कुरा देना जिधर भी देखिए रुसवाइयों के पहरे हैंमेरे ख़ुतूत मेरे साथ ही जला देना…

  • करवाचौथ का | Karwa Chauth Ka

    करवाचौथ का दिख रहा दीवाना जन-जन तुमको करवा चौथ काभरना होगा आज दामन तुमको. करवा चौथ का हाथ खाली आ गये लाये नहीं उपहार कुछध्यान तो रखना था साजन तुमको करवा चौथ का कर दिया क्या क्या निछावर मैंने तुम पर प्यार सेयाद दिलवायेगा दर्पन तुमको करवा चौथ का प्यार से पानी पिलाना खोलूँगी उपवास…

  • नही करते | Nahi Karte

    नही करते ( Nahi karte )   वैसे किसी को बेवज़ह आहत नहीं करते गैरत कोई छेड़े तो मुरव्वत नहीं करते ॥ कोशिश यही रहती न कभी भूल कोई हो गर हो तो सीखते हैं नदामत नहीं करते ॥ इन्साफ हुआ अंध है गूंगा है ज़माना बरसर-ए-विधा भी तो हिफाज़त नहीं करते ॥ अहबाब को…

  • गुलज़ार हो तुम | Gulzar ho tum

    गुलज़ार हो तुम ( Gulzar ho tum )   हजारों ख्वाहिशें दबी दिल में, कहीं ये दम यूं ही न निकल जाए, इंतज़ार ए उम्मीद में कहीं, आरजूओं का मौसम न बदल जाए।   रगों में खौलता ये लहू कहीं, बेसबर आंखों से न बह जाए , संभाल आंगन ये तेरे सपनों का, कहीं सपनों…

  • ले गया सकूँ | Sukoon Shayari in Hindi

    ले गया सकूँ ( Le gaya sukoon )    न रही उसको अब उल्फ़त है ? ले गया सकूँ सब राहत है चोट लगी ऐसी दग़ा की कल अब उल्फ़त दिल से रुख़सत है गुल न लिया चाहत का उसने टूटी दिल की ही हसरत है उल्फ़त में ऐसा टूटा दिल न यहाँ दिल को…

  • प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता

    प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता प्रेम कभी झूठ नहीं बोलताना ही किसी का वो बुरा सोचता शांत कुशल सौम्य एवं संयमीशब्द बिना मौन से है बोलता साथ की आदत है एसी पड़ गयीपल भी अकेला वो नहीं छोड़ता दूर ही रहता है विवादों से वोफूट चुकी मटकी नहीं फोड़ता यार सृजनशील है सपने में भीखंडहरो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *