तमन्न-ए-क़ल्ब

तमन्न-ए-क़ल्ब | Tamanna-e-Qalb

तमन्न-ए-क़ल्ब

( Tamanna-e-Qalb )

हर तमन्न-ए-क़ल्ब मर जाए।
वो अगर अ़ह्द से मुकर जाए।

और भी आब-जू निखर जाए।
वो अगर झील में उतर जाए।

वो अगर देख ले नज़र भर कर।
सूरत-ए-आईना संवर जाए।

क्या करें जान ही नहीं जाती।
जान जाए तो दर्द-ए-सर जाए।

जेब ख़ाली है ह़ाल बोसीदा
ऐसी ह़ालत में कौन घर जाए।

हाथ रख दे जो,वो मुह़ब्बत से।
दर्द कैसा भी हो ठहर जाए।

हाय क्या हो गया फ़राज़ इसको।
उसकी जानिब ही ये नज़र जाए।

मुझको इतना फ़राज़ बतला दे।
कैसे उन तक मिरी ख़बर जाए।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • है तेरी रहमत ग़ज़ब | Hai Teri Rahmat Gazab

    है तेरी रहमत ग़ज़ब ( Hai teri rahmat gazab )   है गज़ब की शान तेरी है तेरी रहमत गज़ब मेंरे मौला तेरी अज़मत है तेरी ताकत ग़जब। है अजब ये बात की मैं उफ़ भी कर दूं तो क़हर और उससे क़त्ल होकर भी मिले राहत ग़जब। दे रहा था हक़ मेरा मुझको मगर…

  • रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ | Roz Jeetee Hoon Roz Marti Hoon

    रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ ( Roz jeetee hoon roz marti hoon ) रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँशम्अ सी रोज मैं तो जलती हूँ पिघला देती हूँ मैं तो पत्थर कोमैं जो सोचूँ वही मैं करती हूँ ईंट का दूँ जवाब पत्थर सेमैं कहाँ अब किसी से डरती हूँ बीत जाता तो फिर…

  • कहां ढूंढू | Kahan Dhundu

    कहां ढूंढू ( Kahan dhundu )   गौतम, नानक-राम कहां ढूंढू मजहब के चार धाम कहां ढूंढू अमन के जैसे गुजरे है दिन वैसी सुबहो – शाम कहां ढूंढू मुंह में राम है बगल में खंजर ‘ सत्यवादी ‘ इक निज़ाम कहां ढूंढू मजहब-मजहब लड़ने वाले हैं सब ‘इंसानियत ‘ का पैगाम कहां ढूंढू झूठ-फरेब…

  • अज़ब धोखा हुआ | Dhoka Shayari Hindi

    अज़ब धोखा हुआ ( Ajab dhoka hua )    कल, बुलंदी की तलब में रूह का सौदा हुआ ज़िन्दगी भारी हुई देखो अज़ब धोखा हुआ ॥   राह-ए-उल्फ़त में चले नीयत सदाक़त अर्श पर फिर तभी रुसवाइयों का भी उन्हें ख़द्शा हुआ  ॥   बढ़ रहे बेगार, मुफ्लिश सर- जमीं मक्तल हुई हिल गया रब,…

  • कैसे हो दीदार सनम का | Deedar Ghazal

    कैसे हो दीदार सनम का ( Kaise ho deedar sanam ka )    कैसे हो दीदार सनम का पर्दे में जब प्यार सनम का रुत मस्तानी हो और यूं हो बाहें डालें हार सनम का दिल दीवाना बन जाता है ऐसा है मेआर सनम का मीठा दर्द जगाये दिल मे तीर लगे जब पार सनम…

  • दुनिया के

    दुनिया के भाग फूटे पड़े हैं दुनिया के।पांव उखड़े पड़े हैं दुनिया के। खेल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के।दाम उतरे पड़े हैं दुनिया के। दौर कैसा है यह तरक़्क़ी का।काम सिमटे पड़े हैं दुनिया के। जिस तरफ़ देखिए धमाके हैं।ह़ाल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के। बन्दिशों के अ़जब झमेले हैं।हाथ जकड़े पड़े हैं दुनिया के।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *