दिल से

दिल से | Dil Se

दिल से

( Dil Se )

आप क्या,सबसे बाख़ुदा दिल से।
हमने की है सदा वफ़ा दिल से।

चैन हम को ज़रूर आएगा।
आप दे-दें अगर दवा दिल से।

हम पे मरता है या नहीं मरता।
पूछ कर देखिए ज़रा दिल से।

हम तो रूठे हैं बस मुरव्वत में।
आपसे कब हैं हम ख़फ़ा दिल से।

अपनी तक़दीर भी संवर जाए।
आप कर दें अगर दुआ़ दिल से।

ख़्वाब में हम ज़रूर आएंगे।
आप ने याद गर किया दिल से।

साथ ले कर ही अपने जाएगी।
आएगी जिस घड़ी क़ज़ा दिल से।

बात की उ़म्र भर मुह़ब्बत की।
हमने की बस यही ख़ता दिल से।

सब मुह़ब्बत से तुमको देखेंगे।
तुम भुला दो अगर अना दिल से।

सारी दुनिया से वो हुआ ग़ाफ़िल।
जो फ़राज़ उसका हो गया दिल से।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • खुमार सावन का | Ghazal Khumaar Sawan ka

    खुमार सावन का ( Khumaar Sawan ka ) बीता मौसम हज़ार सावन का आप बिन क्या शुमार सावन का बात बनती नज़र नही आती है अधूरा जो प्यार सावन का इक नज़र देख लूँ अगर तुमको । तब ही आये करार सावन का वो न आयेगा पास में मेरे क्यों करूँ इंतज़ार सावन का आप…

  • ज़िन्दगी पराई हो गई

    ज़िन्दगी पराई हो गई बेवफ़ा नहीं थी उससे बेवफ़ाई हो गईहोता ही नही यकीन जग हँसाई हो गई दे रही थी ज़ख़्म जो अभी तलक यहाँ मुझेदेखिए वो खुद ही ज़ख़्म की दवाई हो गई होठ मे गुलों की खुशबू और बातों में शहददो घड़ी में उससे मेरी आश्नाई हो गई बढ़ रही थी धड़कने…

  • जो ज़ख़्म बेनिशां थे वो नासूर हो गए

    जो ज़ख़्म बेनिशां थे वो नासूर हो गए हम क्या ह़रीमे-नाज़ से कुछ दूर हो गए।जो ज़ख़्म बेनिशां थे वो नासूर हो गए। सब इ़ज्ज़ो-इन्किसार ही काफ़ूर हो गए।मसनंद नशीं वो क्या हुए मग़रूर हो गए। बेचैन उनके इ़श्क़ ने इतना किया के बस।हम उनसे बात करने को मजबूर हो गए। वो संग थे यूं…

  • मुझे ये बात | Mujhe ye Baat

    मुझे ये बात ( Mujhe ye Baat ) मुझे ये बात लोगों ने कही हैगलत है तू मगर फिर भी सही है नयी है और मज़बूत भी परन जाने क्यों इमारत ढह रही है बिना तारीख़ वाली ज़िन्दगी कीकठिन मौखिक परीक्षा आज ही है कुशल तैराक बनकर आज यारोंग़ज़ल शब्दों के सागर में बही है…

  • दुख ही दुख | Dukh Shayari Hindi

    दुख ही दुख ( Dukh hi dukh )   बोझ यहीं रहता है मन में दुख ही दुख झेले बचपन में याद बहुत आया आज मुझे खेला हूँ जिस घर आंगन में फ़ूल भरे दामन में कैसे वीरां है गुलशन गुलशन में और नहीं कोई भाता है तू रहती दिल की धड़कन में याद किसी…

  • रूह़-ए-नज़र | Rooh-e-Nazar

    रूह़-ए-नज़र ( Rooh-e-Nazar ) नक़्शा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है।जलवा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है। छुपते थे जिसको साय में शर्मा के वो सदा।परदा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है। हंसते हुए दिया था जो उसने गुलाबे इ़श्क़।तोह़फ़ा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है। लिक्खा था ख़ूने दिल से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *