यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

दूर जाकर भी ख़ुश जमाल अपना।
यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

जो भी है आपका ही है वल्लाह।
हम को कुछ भी नहीं मलाल अपना।

कुछ तो बतलाओ ऐ तबीब-ए-दिल
ह़ाल कैसे हो अब बह़ाल अपना।

कौन देखेगा माहो-अन्जुम को।
छत पे आ जाए गर हिलाल अपना।

ह़ालत-ए-ह़ाल भूल जाओगे।
हम दिखा दें अगर कमाल अपना।

काम तौबाएं भी नहीं आतीं।
वो दिखाता है जब जलाल अपना।

कुछ न कुछ तो जवाब देते हम।
आप रखते तो कुछ सवाल अपना।

वो ख़फ़ा क्या फ़राज़ हो बैठे।
जीना-मरना हुआ मुह़ाल अपना।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया

    तेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया उम्र भर बस ये रोज़गार कियातेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया बेसबब ख़ुद को दाग़दार कियाजाने क्यों तेरा ऐतिबार किया ज़ीस्त में अब न लुत्फ़ है कोईक्या कहें घर को ही मज़ार किया क्यों न करते भी शुक्रिया उसकाजिसने मौसम को ख़ुशगवार किया ज़ख़्म खाये हज़ार थे हमनेमरहम-ए-वक़्त ने सुधार किया…

  • बदलते जा रहे हैं क्यूं | Kyon Shayari

    बदलते जा रहे हैं क्यूं ( Badalte ja rahe hain kyon )    सुहाने ख्वाब मुट्ठी से फिसलते जा रहे हैं क्यूं जो हैं नजदीक दिल के वो बदलते जा रहे हैं क्यूं किये सब फैसले दिल से बड़ी गलती हमारी थी गलत वो फैसले सारे निकलते जा रहे हैं क्यूं अना उनमें बहुत है…

  • वफ़ादार नहीं थे | Wafadar Shayari

    वफ़ादार नहीं थे ( Wafadar nahi the )  बहर-मफऊल -मुफाईल-मुफाईल-फऊलुन   कुछ दोस्त हमारे ही वफ़ादार नहीं थे वरना तो कहीं हार के आसार नहीं थे ख़ुद अपने हक़ों के हमीं हक़दार नहीं थे हम ऐसी सियासत के तलबगार नहीं थे झुकने को किसी बात पे तैयार नहीं थे क्यों हम भी ज़माने से समझदार…

  • छलावा | Chalawa

    छलावा ( Chalawa )    रंगीन दुनिया में सबका अपना -अपना पहनावा है, कहीं सच में झूठ,कहीं झूठ में सच का दिखावा है। बेमतलब ख़्वाबों से रिश्ते गढ़ता रहता है कोई मन को तह रख तर्कों से कोई करता छलावा है। आवारा बादलों की ज़द कहाँ समझ पाया दिल ठिकाना और भी इनका बरखा के…

  • अरमान बाकी है | Armaan Baki Hai

    अरमान बाकी है ( Armaan Baki Hai )   इक अरसे जो तेरे बगैर चली वो साँस काफी है, बिछड़ कर भी तू मेरा रहा ये एहसास काफी है, सब पूछते हैं कैसे सफ़र किया तन्हा, मैंने कहा ज़िंदा रहने केलिए आख़िरी मुलाकात काफी है, तेरे ख़्याल से ही रौशन रहीं मेरी तन्हाईयाँ सदा, तुझे…

  • झूठा ज़रूर निकलेगा | Jhutha Zaroor Nikalega

    झूठा ज़रूर निकलेगा ( Jhutha Zaroor Niklega ) तेरा ये फ़ैसला झूठा ज़रूर निकलेगा कुसूरवार जो था बेकुसूर निकलेगा यक़ीं है शोख का इक दिन ग़ुरूर निकलेगा वो मेरी राह से होकर ज़रूर निकलेगा पलट रहा है वरक़ फिर कोई कहानी के न जाने कितने दिलों का फ़ितूर निकलेगा पिला न साक़िया अब और जाम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *