काश कि तुमने ये बताया होता

काश कि तुमने ये बताया होता | Prem ras kavita

 काश कि तुमने ये बताया होता 

( Kash ki tumne ye bataya hota )

 

काश कि तुमने ये बताया होता
कि मैं क्यों दूर होता जा रहा हूँ तुमसे
न कोई गिला-शिकवा फिर भी
बातों का सिलसिला शुरू नहीं
एक दिन, दो दिन,पाँच दिन,बीस दिन
आखिर कब तक? ये तो बताया होता ।
हौले-हौले बातें तो कम हो गई है
अब मुलाकातें भी बन्द हो जाएगी
भूले से भी क्या याद नहीं आती?
क्यों एकदम से इतना पराया कर दिया।
कुछ बात थी तो बताते मुझसे ए-यार!
हम वैसे ही अपने को दूर कर लेते।
अपना दोस्त मानता था तो फिर
क्यों नाराज़ हो गए हो मुझसे
अपना तो दोस्ती से भी बढ़ कर
रिश्ता बन गया था अपने बीच में
फिर दूर जाने की वजह तो बताई होती
हम खुद ही तुमसे किनारा कर लेते।

 

🍁
लेखक :सन्दीप चौबारा
( फतेहाबाद)

यह भी पढ़ें : 

मदर्स डे कविता | Mother’s day kavita

 

Similar Posts

  • दीपक वोहरा की कविताएं | Deepak Vohra Poetry

    कविता में वो कविता मेंकविता ढूंढ़ रहे हैंमैं मनुष्यता वो कविता मेंभाषा देख रहे हैंमैं तमीज़ वो कविता मेंशिल्प शैली छान रहे हैंमैं पक्षधरता छंद, रस, बिंब ,सौन्दर्य, लयन जाने क्या क्या कसौटी परवो परख रहे हैं कविता और मैं न बाज़ीगर हूं कविता कान ही तथाकथित बड़ा साहित्यकारबस मनुष्यता का पक्षधर हाथ वो हाथजो…

  • आंचल की छांव | Kavita Aanchal ki Chhaon

    आंचल की छांव ( Aanchal Ki Chhaon )   वात्सल्य का उमड़ता सिंधु मां के आंचल की छांव सुख का सागर बरसता जो मां के छू लेता पांव   तेरे आशीष में जीवन है चरणों में चारो धाम मां सारी दुनिया फिरूं भटकता गोद में तेरे आराम मां   मेरे हर सुख दुख का पहले…

  • काश!

    काश! कर्म न जाने ,धर्म न जाने फिर सोचे यही बातकाश ! ये करता ,काश! वो करताकाश ! ये होता, काश ! वो होताकाश -काश कश्मकश में उलझा है इंसान ,माया के इस चक्रव्यूह में फंसा हुआ है नादान। सत्य ना बोले ,नित्य ना होवे,फिर सोचे यही बातकाश ये सुनता ,काश वो सुनताकाश ये होता,…

  • प्यारी पाती | Kavita Pyari Paati

    प्यारी पाती ( Pyari Paati )   मां की आस पिता का संबल बच्चों की अभिलाषा! प्यारी पाती आती जब थी पुलकित घर हो जाता!! घरनी घरमें आस लगाए रहती बैठी ऐसे ! ‘जिज्ञासु’ चकोर चांद के लिए टक टकी लगाए जैसे!! सीमापर जवान को अपनी चिंता दूर भगाती ! बीवी बच्चे मात-पिता संग सबका…

  • वर्तमान समझ | Vartman Samaj

    वर्तमान समझ ( Vartman Samaj )   शिक्षा का विकास हुआ,समझ अधूरी रह गई पूरे की चाहत मे ,जिंदगी अधूरी रह गई बन गए हों कई भले ही महल अटारी चौबारे मुराद भीतर ही मन की,दम तोड़ती रह गई बिक गए पद,सम्मान औ प्रसंशा के मोल मे माता स्वाभिमान की,छाती पिटती रह गई सोच बदली…

  • फिर हमने मोहब्बत को सरे आम कर | Mohabbat ko Sare Aam

    फिर हमने मोहब्बत को सरे आम कर ( Phir humne mohabbat ko sare aam kar )    छुप छुप के दिल का बुरा हाल कर लिया सच जानिए तो जी का जंजाल कर लिया समझ जो आया,एक उम्र बीत जाने के बाद फिर हमने मोहब्बत को सरे आम कर दिया फिर हमने मोहब्बत को सरे…

One Comment

  1. बहुत बहुत हार्दिक आभार जी आपका मेरी कविता को प्रकाशित करने के लिए?????

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *