साथ रहे तुम

निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम

निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम

निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम,
2024, खत लिखना चाहती हूं मैं तुम्हें।
जीवन की उपलब्धियों में संगी बनाना चाहती हूं,
कभी हौसलों को परखते रहे,
कभी चलने का साहस बढ़ाते रहे।

तुम ने एकांत के एहसासों को कोमलता से जगाया,
अनुभवों की यात्रा में नयन सजल हुए जब,
तुमने ही मुझे हृदय से लगाया।

तुम ही तो मेरे लिए एक नया वर्ष लेकर आ रहे हो,
अपनी उपलब्धियों से मुझे परिचित करवा रहे हो।

विद्या का मंदिर सामने ही उपलब्ध करवाया,
गुरु ज्ञान के साथ मन के मीत से मिलवाया।
आशा और उम्मीद के साथ मुझे बता रहे हो,
तुम्हारा अनुभव ही काम आएगा,
वही तुम्हारा साथ निभाएगा।

मैं तुम्हारा अभिनंदन के साथ वंदन करती हूं,
तुमने मुझे जीवन पथ पर बढ़ाया
आने वाले वर्ष में तुम्हारा साथ ही
मुझे अवनी का स्वर बनाएगा।

ritu garg

ऋतु गर्ग

सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल

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