एकता का प्रतीक
एकता का प्रतीक
एकता का प्रतीक मकर संक्रान्ति
जिन्हें जानकर दूर होगी भ्रांति
सभी जाति ,संप्रदाय, पंथ वालों
मिलकर रहो बनी रहेगी शांति ।
तिल है काला
चावल है उजला
शक्कर है गेरूआ
मूंग है हरा
सभी है एक रस में घुला ।
चावल , दाल मसाले मिलकर
सबने एक खिचड़ी बनाई
यह पर्व मानव को सौंपकर
ऋषि, मनि एक बात सिखाई ।
भले हमारा धर्म अलग हो
हमारा कभी ना कर्म अलग हो
मिलकर रहे सभी वर्ग के
जीवन का ना मर्म अलग हो ।
कोई मूल्यवान रहे या साधारण
जो किए हैं मानव तन को धारण
समाज में सभी बराबर है
खिचड़ी है उनका उदाहरण ।
चलो मस्ती में पतंग उड़ाए
जितना दूर हम उन्हें भगाए
उनसे बड़ी हम सोच बनाए
दूर, नजदीक के हम सब प्राणी
एक धागा में बंध के रह जाए ।

रवीन्द्र कुमार रौशन “रवीन्द्रोम “
भवानीपुर, मधेपुरा, बिहार
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