मौजू सुहाने आ गये
मौजू सुहाने आ गये
वो बहाने से हमें हर दिन बुलाने आ गये
शायरी के वास्ते मौजू सुहाने आ गये
इस कदर डूबे हुए हैं वो हमारे प्यार में
उनकी ग़ज़लों में हमारे ही फ़साने आ गये
अनसुनी कर दी जो हमने आज उनकी बात को
होश इक झटके में ही उनके ठिकाने आ गये
उस घड़ी हमको मुहब्बत का भरम रखना पड़ा
जब हमारे हमनवा हमको मनाने आ गये
आ गये दीवार वो अपनी अना की तोड़ कर
लौट कर लगता है पहले से ज़माने आ गये
ख़ुद को तन्हा जानकर मायूस मत होना कभी
साथ हम हर मोड़ पर तेरा निभाने आ गये
प्यार में इक दूसरे के हमको डूबा देखकर
कुछ सयाने लोग साग़र बरगलाने आ गये

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
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