बच्छराज काकासा

बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष

बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष

नई भोर नव ऊर्जा आनंद
नव प्रभात के हम अभिलाषी है।
सूरज की पहली किरण संग ! काकासा
उजास ! आरोग्य !आनंद और विकास !
हो वर्धमान ,रहे प्रकाशमान ! काकासा
आपके जीवन के हर पल में संग !
बच्छराज काकासा का
20 जनवरी को जब
जन्मदिन आता है तो
हमको यह बात बताता है कि
हम सदैव फूलों में सुवास
जैसे जीवन में रिश्तों में मिठास,
वह आनंद का आभास करते रहे ।
हमारे जीवन में सदैव
नम्र एवं कुशल व्यवहार
रिश्ते निभाने के लिए हो ।
हम बच्चों द्वारा प्रतिवर्ष
आपके आशीर्वाद से ऐसा
प्रयास करते रहना हर
वर्ष हमको विगत वर्ष से
कुछ अधिक पाने की
लालसा , जिज्ञासा आदि
जगाता रहता हैं। वह
आपका बच्चों के प्रति
ऊर्जा से ओत- प्रोत प्यार
हमारे मन में अहंकार के
बीजारोपण को रोकता हैं।
यह आज का दिन हमारे जीवन
से जुड़ा एक अकल्पनीय एवं
महत्वपूर्ण सुखद पल है ।
यह हमारे लिए सदैव प्रेरणादायी
व मिठास से भरे यादगार पल है ।
मेरे को वह हम सबको आप
यह आशीर्वाद दे कि हमारे
जीवन में सदा शांति प्राप्त हो।
पुष्टि एवं तुष्टि बनी रहे।
सद्गुणों की वृद्धि हो।
विघ्नों का सर्वनाश हो।
दीर्घ निरामय आयुष्य हो।
शुभ कर्मों एवं धन-
धान्य की समृद्धि हो।
जो कुछ भी श्रेय है
सभी हमको सदा प्राप्त हो।
वह हमारा जीवन शिखर चढ़े ।
वह नव सोच नव कृतित्व से
स्वर्णिम इतिहास हम गढ़े ।
इन्हीं मंगल कामनाओं के साथ
आपके जीवन की स्वर्ण जयन्ती
की मंगलकामना करते है ।
आत्मा के “प्रदीप “ पाने की
मंगलकामना करते है ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • लघुदीप | Laghudeep

    लघुदीप ( Laghudeep )    सघन तिमिर को तिरोहित कर देती है कक्ष से नन्हीं-सी लौ लघुदीप की। टहनी से आबद्घ प्रसुन बिखर जाते है धरा पर सान्ध्य बेला तक पर, असीम तक विस्तार पाती है– उसकी गन्ध रहता है गगन में चन्द्र पर, ज्योत्स्ना ले आती है उसे इला के नेहासिक्त अंचल तक बाँध…

  • पिता | Pita kavita

    पिता ( Pita )   खुशियों का खजाना है, वो प्यार का सागर है। सर पर ठंडी छाया, पिता प्रेम की गागर है।   गोद में लेकर हमको, दुनिया दिखलाते जो। अंगुली पकड़ हमारी, चलना सीखलाते वो।   तुतलाती बोली को, शब्दों का ज्ञान दिया। ठोकर खाई जब भी, हमको थाम लिया।   जब जब…

  • भटकता मन | Kavita

    भटकता मन ( Bhatakta man )   भटकते मन में मेरे आज भी, कुछ आस जिन्दा है। भरा  है  चाहतों  से  शेर मन पर, प्यास जिन्दा है।   उसी  को  टूट  कर चाहा, खुदी को ही भुला करके, अधुरी चाहतों का अब भी कुछ,एहसास जिन्दा है।   किसी को चाहना और वो मिले, ये सच…

  • बेटी मां की परछाई | Beti Maa ki Parchai

    बेटी मां की परछाई ( Beti maa ki parchai )    मां की तरह, मीठी मीठी बातें करती। घर आंगन महका देती, नन्हे नन्हे हाथों से, ला रोटी पकड़ा देती। एक रोज जो साड़ी पहनी, मां जैसी वो लगने लगी, सच कहूं तो बिटिया मेरी, अपनी मां की परछाई है। कुछ मन का न हो…

  • हो शालू | Bhojpuri kavita ho Shalu

    हो शालू! ( Ho Shalu )   झमकावेलू,   आंख देखावेलू   लचकावेलू,   मटकावेलू   धमकावेलू,   महटियावेलू   ना आवेलू,   अंठियावेलू   सुनावेलू,   सतावेलू।   लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर सलेमपुर, छपरा, बिहार । यह भी पढ़ें : मंजूर के दोहे | Manzoor ke dohe

  • Kavita | कुंभ की धार्मिक महत्व

    कुंभ की धार्मिक महत्व ( Kumbh ka dharmik mahatva )   सनातन धर्म की पौराणिकता को, याद दिलाता है यह कुंभ । बारह वर्षों में एक बार ही , आता है यह कुंभ ।   सभी देवों का धरती पर , होता जिस पल आगमन । संघ साधु संत के सानिध्य का , अवसर दे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *