लघुदीप | Laghudeep

लघुदीप

( Laghudeep ) 

 

सघन तिमिर को
तिरोहित कर देती है कक्ष से
नन्हीं-सी लौ लघुदीप की।
टहनी से आबद्घ प्रसुन
बिखर जाते है धरा पर
सान्ध्य बेला तक
पर, असीम तक
विस्तार पाती है–
उसकी गन्ध
रहता है गगन में चन्द्र
पर, ज्योत्स्ना ले आती है उसे
इला के नेहासिक्त अंचल तक
बाँध अपने स्निग्ध भुज पाश में।
जड़ बाँस की नन्हीं-सी बाँसुरी
जब आ जाती है
कृष्ण के अधरों पर,
मधुर स्वरों से
गुंजित कर देती है
अनन्त के उस पार तक।
सीमाओं में निबद्ध
महासागर बन घनश्याम
चूम लेता है–
उत्तुंग गिरि-शिखरों के
स्वेत कपोलों को
छू लेता है अनन्त ऊँचाइयाँ
आकाश की
और चुपके से दे देता है
श्रंगार जीवन को।
स्थिर कगार शैलजा के
नही पहुँच पाते कहीं भी
पर, उन पर पड़े धूलकण
सानिध्य लहरों के पाकर
पहुँच जाते है जल निधि तक।।

 

डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’

लेखिका एवं कवयित्री

बैतूल ( मप्र )

1–शैलजा – नदी को कहा है।

यह भी पढ़ें :-

कृष्ण अवतारी | Krishna Avtari

Similar Posts

  • पंचतत्व में मिल जाना है | Panchtatva par kavita

     पंचतत्व में मिल जाना है ( Panchtatva mein mil jana hai )   पंचतत्वों से बना यह हमारा शरीर, दानव- मानव चाहें गरीब- अमीर। इनसे बना सृष्टि का प्रत्येक पदार्थ, आकाश वायु अग्नि पृथ्वी व नीर।।   सृष्टि के माने गए यह पंचमहाभूत, साफ़ स्वच्छ रखना सबको जरुर। बंद मुट्ठी आए खुल्ली मुट्ठी जाएंगे, एक…

  • अष्ट दीप दान

    अष्ट दीप दान आदि लक्ष्मी अर्पित करें, प्रथम दीप का दान।ह्रदय बुद्धि शीतल करें, और बढ़ाएँ मान।। 1।। धन लक्ष्मी को दीजिये, दूजा दीपक दान।भौतिक सुख सम्पन्नता, मान और सम्मान।। 2।। कौशल प्रतिभा ज्ञान का, दीप तीसरा दान।विद्या लक्ष्मी जान कर, मनुज बढ़ाया मान।। 3 ।। अन्न बिना जीवन नही, अर्पित लक्ष्मी धान ।चौथा दीपक…

  • शैलपुत्री | Kavita shailputri

    शैलपुत्री ( Shailputri )   गिरिराज घर जन्मी देवी शैलपुत्री कहलाई। कमल सुशोभित कर में शक्ति स्वरूपा माई।   तुम त्रिशूलधारी भवानी हो वृषारूड़ा हो माता। मंगलकारणी दुखहर्ता मां तुम ही हो सुखदाता।   प्रजापति ने यज्ञ किया सब देवन को बुलवाया। विकल हो गई सती मां शिवशंकर नहीं बुलाया।   घर पहुंची मैया स्नेह…

  • शब्दों का सफर | Poem shabdon ka safar

    शब्दों का सफर ( Shabdon ka safar )   शिकस्त शिकस्त कर देंगे मंसूबे हम अपने प्यार से। कह देंगे राज सारे आज अपने दिलदार से। दुश्मनों से कह दो आंखें खोलकर देखें जरा। तूफानों में पलने वाले डरते नहीं तलवार से।   चौबारा घर का आंगन दीवारें वो चौबारा भी गाता है बिटिया आंगन…

  • विवशता | Kavita Vivashata

    विवशता ( Vivashata ) (2 )  मेरे भोले पन का सबने , किया खूब उपयोग । किस-किस का मैं नाम गिनाऊँ , सब अपने है लोग ।। मेरे भोले पन का अपने …. नहीं स्वार्थ की भाषा सीखी , कर दी हमने भूल । पल-पल हर पल चुभते हैं अब , हृदय हमारे शूल ।।…

  • आस्तीन का सांप | Kavita aasteen ka sanp

    आस्तीन का सांप ( Aasteen ka sanp )      कोई भी नहीं बनना यह आस्तीन का सांप, दोस्त अपनें हृदय को रखना हमेशा साफ़। नहीं सोचना कभी भी बुरा किसी का आप, अपना या पराया एक बार तों करना माफ़।।   जिसमें जो है खाता उसी मे छेद ना करना, अपना हो या पराया…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *