Geet Man Shivalay ho Jaye

शीश शिव गंगा धरे

शीश शिव गंगा धरे

( छन्द : मनहरण घनाक्षरी )

शीश शिव गंगा धरे ,सब ताप कष्ट हरे,
जप नाम शिव प्यारे ,
तब होगे काम रे!!!
शिव पूजा सब करे ,आज होगे काज पूरे,
गुंज रहा सारी सृष्टी,
सदाशिव नाम रे !!!
शिव प्रिय बिल्व फल ,भक्त लिये गंगाजल,
प्रभुल्लित सब चले ,
शिवाप्रिया धाम रे !!!
शिव पर्व जब आया ,साथ सब खुशी लाया ,
नर नारी शिव पूजे ,
सुबह व शाम रे !!!

डॉ कामिनी व्यास रावल

(उदयपुर) राजस्थान

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • अहसास | Ahsas par Chhand

    अहसास ( Ahsas )   सुहाना अहसास हो, मेरे दिल के पास हो। लगता कोई खास हो, मन मीत आइए।   मधुर संगीत कोई, तराना हो प्यार भरा। जिंदगी के सफर में, सदा मुस्कुराइए।   महकती बयार हो, अहसास खुशियों का। मधुर मुस्कान कोई, लबों पर लाइए।   सावन बरसता हो, या तुम घटाएं काली,…

  • करवा चौथ | Chhand karva chauth

    करवा चौथ ( Karva chauth )   सुहागनें नारी सारी, करवा चौथ मनायें। कर सोलह श्रंगार, गौरी चांद मना रही। मनमीत प्रियतम, प्राण प्यारे भरतार। लंबी जीए उम्र जग, मंगल कामना कहीं। दिलों का पावन रिश्ता, टूटे ना तकरार से। प्रीत का झरना बहे, प्रेम की सरिता बही। धवल चांदनी सुधा, उमड़ा सागर प्रेम। पिया…

  • सतरंगी फाग | Chhand Satrangi Fag

    सतरंगी फाग ( Satrangi fag )    इंद्रधनुषी रंगों का, सतरंगी फाग छाया। बसंत बहारें चली, मस्त लहर लहर। प्रियतम भीगा सारा, सजनी भी भीग गई। रंगीला फागुन आया, बरसा पहर पहर। गाल गुलाबी महके, रंग गुलाल लगाके। फाग गाते नर नारी, गांव शहर शहर। झूमके नाचे रसिया, सुरीली धमाल बाजे। बांसुरी की तान छेड़े,…

  • चितवन | Chitwan

    चितवन ( Chitwan )  मनहरण घनाक्षरी चंचल मनमोहक, चितवन मन मोहे। बांसुरी कन्हैया तोरी, तान छेड़े मन में। मोर मुकुट माधव, गले वैजयंती माला। केशव मुस्कान प्यारी, मन लागे लगन में। राधा के मोहन प्यारे, हर जाए चितवन। छवि घनश्याम कान्हा, बसी मोरे तन में। गोपियों के गिरधारी, गिरधर बनवारी। मधुबन बज रही, मुरलिया वन…

  • वरदान | Vardan Chhand

    वरदान ( Vardan ) मनहरण घनाक्षरी     जिंदगी वरदान से, कम ना समझ लेना। हंसी खुशी आनंद से, जीवन बिताइये। मात पिता आशीष दे, करो सेवा भरपूर। चरण छूकर प्यारे, वरदान लीजिए। साधु संत ऋषि मुनि, करे जप तप योग। वरदान से सिद्धियां, शुभ कार्य कीजिए। बड़े-बड़े महारथी, योद्धा वीर बलवान। कठोर तपस्या करें,…

  • सर्वशक्ति कालिका | Sarvashakti Kalika

    सर्वशक्ति कालिका ( चामर छन्द ) 1सर्वशक्ति कालिका कराल रक्त दंतिका।शांभवी सुधा सती सुगम्य चंद्रघंटिका।।चंद्रिका सुबोधिनी गदा त्रिशूल धारिणी।हस्त शंख चक्र ले निशुंभ शुंभ तारिणी।। 2हे अजा सिता अगम्य मातु हे पताकिनी।दुर्गमा त्रिलोचनी विशाल दैत्य नाशिनी।।शारदे सँवार दे अबोध माम् तूलिका।ज्ञान के विहान से प्रकाशवान मूलिका।।(औषधीय जड़ी) 3दुष्ट शत्रु वंश बेल हारिणी कपालिनी।अट्टहास कालिका कुमारि…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *