आशी प्रतिभा दुबे की कविताएं | Aashi Pratibha Dube Poetry

मंज़िल है तो मुश्किल भी होगी

मंज़िल है तो मुश्किल भी होगी !
रास्ते है तो रूकावटे भी होंगी ,
अब फर्क नहीं पड़ता कुछ भी
हार है तो फिर जीत भी होगी
जनाब जिंदगी इसी का नाम है
कभी आंधी है जज्बाती यहां ,
तो नम निगाहों से बरसात भी होगी ।
आम है ये किस्से मेरे तुम्हारे बहुत
आज बिछड़े है तो कल मुलाकात भी होगी ।
रुकता नही सफ़र रोकने से किसी के भी ,
समय का विकल्प तो समय ही है स्वयं खुद
आरंभ और अंत है जब हर कहानी का !
तो फिर एक नई शुरुवात भी तो होगी ।।

मुकर गए अभी

अभी अभी आए चल दिए अभी
खिल उठे थे हम बिखर गए अभी।

हवा का झोका आया हो जैसे
आए थे मेरी महफिल में अभी

जादू दिखाया अपना और
मुस्कुराकर संवर गए अभी

बातें उनकी थी दिलकश बड़ी
उलझकर उनमें थम गए अभी

रोकना तो चाहा था बहुत
कुछ सोचकर रुक गए अभी

नखरे बहुत दिखाए यार ने
मिलकर हमसे सुधर गए अभी

याद करेंगे अब वो हमको
दिल देकर मुकर गए अभी।।

सुबह कहती हैं

सुबह कहती हैं,
उठ सूरज आया
नई आशाओं संग ,
उजली किरणे सभी
नवीन ऊर्जा लाया ।।

अपने अपने कर्मों से,
सब भाग्य अपना पाते
विधाता भी इसमें कोई
हस्त छेप ना कर पाया
आशीष दे वह मुस्कुराया ।।

नारी सशक्तिकरण

क्यों सुनती हो दुनिया की
दुनिया का काम है कहना
ऊंच-नीच कुछ हो जाए तो
नारी के नाम का ताना है।।

अबला बन मत काम करो
अपनी शक्ति को पहचानो
नारी अपनी पर जब आ जाए
तो मुठ्ठी में उसके ज़माना है।।

कुच करो पुराने विचारों से
कुरीतियों को अब हटाना है
नई पीढ़ी को अब हे ” नारी “
तुम्हें ही संस्कारवान बनाना है
बनकर सशक्त फिर तुमको अव
इस युग मैं नया इतिहास रचना है।।

नवीन विचार के सूरज से
फिर एक नया सवेरा लाना है ,
बनकर सूरज का प्रकाश
हर अंधकार को मिटाना है।।

उठो अपनी शक्ति को पहचानो
अब कुछ ऐसा करके दिखाना है
वर्तमान समय कि पुकार यही
“नारी सशक्तीकरण ” का जमाना है।।

अपने ही अंदाज में चलो

प्रभु की बंदगी करते रहो ,
अपने ही अंदाज से मस्त रहो
स्वस्थ होगा जीवन भी तुम्हारा
बुरा भला न किसी को कहो ।।

अपने ही अंदाज में चलो ,…..

हंसी मुस्कान लिए मुख मंडल पर
फिक्र को यूंही अपनी घटाते चलो
सुहाने से, ये गीत हंसी खुशी के तुम
सफर का आनंद लेते हुए गाते चलो ।।

अपने ही अंदाज में चलो ……….

अलग अपनी पहचान बना लो ,
तुम अब अपने नए पंख लगालो
किसने किस्से क्या कहा भूलकर
अपने सपनों के आसमान में चलो ।।

अपने ही अंदाज में चलो ……..

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

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