2624 वां महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

2624 वां महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

2624 वां महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

निरख निरख के रूप तुम्हारा “महावीर “दिल भरता ही नहीं,
तेरे चरणों से उठकर जाने को मन करता ही नहीं !!
सफल हो गए नरभव सबके जो भी दर्शन को पाए,
बुला रहा सौभाग्य सभी को विघ्न कोई पड़ता ही नहीं ||

रवि सम आभा मुखमण्डल पर कामदेव सी काया है,
रूप अनंग तेरा प्रभुवर जो हर प्राणी को भाया है !
बाल ब्रम्हचारी तुम स्वामी “वर्द्धमान” चारित्री हो,
“सन्मति” के जुगल पद पर हर भक्त ने शीश नवाया है ।।

पर इन सबसे निस्पृह हो तुम आत्म ध्यान किया करते,
निर्मोही हो “वीर” प्रभु ना तन पर ध्यान जरा धरते,
वीतरागी ये छवि तुम्हारी भक्तों को मन भाती है
कर्म शत्रु सब जीत लिए सो “अतिवीर” भी कहा करते |

अतुल तुम्हारा बाहुबल पर ये ना कोई बात बड़ी,
बारह वर्षों तक कर्म निर्जरा को घोर तपस्या करी कड़ी,
जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर बन सार्थक जन्म किया तुमने,
शल्य रखी न ह्रदय में कोई टूट पड़ी कर्मों की लड़ी ||

सिद्धांत अहिंसा,करूणा, दया का जीवों के प्रति, सिखलाया,
“जियो और जीने दो” का उपदेश जगत में फैलाया,
हिंसा और विध्वंस ने धरा में जब जब पैर पसारा है
“वर्द्धमान” के आदर्शों से विश्व ने समाधान पाया!

शीश झुकाकर तुव चरणन में यही भावना हम भाएं,
“महावीर” सम हम भी मोक्षमार्ग में निराबाध चलते जाएं,
मोह कषाय की विषबेलों से अब तक तो हम जकड़े हैं,
बाहुबलि बन जाएं यहां सभी कर्म के बंधन कट पाएं |

विरेन्द्र जैन

( नागपुर )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • समझौता जिंदगी से | Poem Samjhauta Zindagi se

    समझौता जिंदगी से ( Samjhauta zindagi se ) मात्रा भारत 12-12   डगर डगर पर हमने, तूफानों को देखा। समझोता जीवन में, बदलता किस्मत रेखा।   रिश्तो में मधुरता हो, प्रेम पावनता मिले। पुनीत संस्कार अपने, चेहरे सबके खिले।   औरों की खुशियों में, बरसाओ नेह जरा। जिंदगी रोशन मिले, हर्ष से दामन भरा।  …

  • भीगी पलकें | Bheegi Palken

    भीगी पलकें ( Bheegi palken )    पलके भीग जाती है, बाबुल की याद में, तन्हाई बड़ी सताती है, अब मायके के इंतजार में।। यह कैसे रीत तूने खुदा है बनाई, बचपन का आंगन छोड़, होजाती है परियो की विदाई।। जिम्मेदारी के ढांचे में ढलना ही होता है, पलके पर आंसू छुपकर , हर फर्ज…

  • काश!

    काश! कर्म न जाने ,धर्म न जाने फिर सोचे यही बातकाश ! ये करता ,काश! वो करताकाश ! ये होता, काश ! वो होताकाश -काश कश्मकश में उलझा है इंसान ,माया के इस चक्रव्यूह में फंसा हुआ है नादान। सत्य ना बोले ,नित्य ना होवे,फिर सोचे यही बातकाश ये सुनता ,काश वो सुनताकाश ये होता,…

  • अलविदा साल 2023 | Alvida Saal 2023

    अलविदा साल 2023 ( Alvida saal 2023 )   शनै शनै यूं गुजर गया, बीत गया पुराना साल । खट्टे मीठे अनुभवों से, कर गया हमको निहाल। काश थोड़ा रुक जाते, वर्ष बिछड़ कर दूर न जाते। बीती यादों के पन्नों में, थोड़ा बैठकर हम बतियाते। क्या खोया क्या पाया, फूल खिले चमन हरसाया। शहनाइयां…

  • माना कि तुम | Love kavita

      माना कि तुम ( Mana ki tum )     माना कि इन हाथों की लकीरों में तुम नहीं….…….. फिर भी मुझमें तुम शामिल हो, लकीरें तो उनके हाथ में भी नहीं होती जिनके हाथ नहीं होते। तुम मुझे हासिल नहीं फिर भी मुझसे तुम दूर तो नहीं हो। इन हाथों की लकीरों में…

  • माँ का कर्ज चुकाना है | Desh Bhakti Kavita

    माँ का कर्ज चुकाना है ( Maa ka karz chukana hai )   सभी भारतीय आज एक हो जाना, उग्रवाद हम को जड़ से ही मिटाना। इन दुश्मनों को अब धूल है चटाना, माँ वसुंधरा का कर्ज हमें है चुकाना।। देश के वीरों ने अपने प्राण गवाएँ है, आंधी तूफ़ान बारिश को भी सहे है।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *