भारत की बुलंद तस्वीर
भारत की बुलंद तस्वीर
पढ़ा था अखबारों में
सुना था समाचारों में
हम देश को विकसित
कर चुके हैं
सब के भविष्य को
सुरक्षित कर चुके हैं
आज देखा मैंने दिल्ली
की कड़कती धूप पर
नन्हे मुन्ने घूम रहे थे
नंगे पांव उसे पथ पर
दिल्ली की सड़कों पर अड़े
कड़क धूप पर खड़े
दिल्ली की सड़कों पर अड़े
कड़क धूप पर खड़े
नन्हे हाथों में गिला
कपड़ा लिए दौड़े पड़े
रेड लाइट पर खड़ी गाड़ियों
को साफ करने की होड़
भूख की आग में
लग रही दौड़
जलती सड़क नंगे पांव
जान की बाजी का
लगा कर दांव
बीच सड़क पर सबके
जोड़ हाथ पांव
भूख की ललक में
धधक रही थी रही थी सांस
निकट भूख के नहीं
लग रही थी
तपती धूप की आंच
क्या यही है मेरे उभरते
भारत का आज
बचपन सड़कों पर बीत रहा
युवा नशे में भटक रहा
परिवार रोजगार के लिए तरस रहा
क्या यही है
क्या यही है
तस्वीर बुलंद भारत की आज
क्या यही है
तस्वीर बुलंद भारत की आज

लेखिका :- गीता पति (प्रिया)
( दिल्ली )







