हीर-रांझा और नेटवर्क

हीर-रांझा और नेटवर्क

एक दिन हीर रांझे से नाराज हो गई। हुआ यूं कि शाम के वक्त जब हीर और रांझा फोन पर बात कर रहे थे, तब हीर की माताजी और भाई हीर के इर्द-गिर घूम रहे थे। उनकी हीर पर नज़र थी। हीर रांझे को अपनी सहेली बताकर बतिया रही थी। रांझा हीर से खुलकर बात नहीं कर पा रहा था। हीर ने रांझे को समझा रखा था कि जैसे ही मेरे आस-पास मेरे परिवार का कोई आएगा तो ऐसी स्थिति में तुम चुप रहना।

सिर्फ मैं ही बोलूंगी, मेरे बोलने से तुम समझ जाना। बेचारा रांझा करता क्या? वह हीर से बेपनाह, सच्ची मोहब्बत करता था। हीर की आवाज उसमें ऊर्जा का संचार भर देती थी। अतः वह मान गया। आज रांझे से एक गलती हो गई। वह हीर को गुड नाइट कहना भूल गया। फोन कट करते वक़्त, हीर ने रांझे को गुड नाईट कहा होगा लेकिन नेटवर्क की वजह से रांझा हीर की गुड नाइट सुन ना पाया। उधर हीर ने गुस्से में फोन कट कर दिया।

इस बात से बेखबर रांझे ने रात में व्हाट्सएप पर गुड नाइट मैसेज भेजकर हीर से पूछा-

“मेरी प्यारी हीर, तुम ठीक हो? तुम्हारे घरवालों ने कुछ कहा तो नहीं? उन्हें तुम पर शक तो नहीं हुआ?”

हीर ने कोई जवाब नहीं दिया। रांझे ने फिर से पूछा-

“क्या हुआ प्रिय? तुम नाराज हो क्या? मुझसे कोई गलती हो गई क्या? अगर अनजाने में कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ कर दो पर मुझसे बात करो।”

“तुम्हें सब पता है। तुम ज्यादा बनकर दिखा रहे हो।” हीर ने नाराजगी में कहा।

“क्या हुआ जान? तुम इस तरह मुझसे क्यों बात कर रही हो? बताओ ना, मेरे से कहाँ गलती हुई है? अनजाने में अगर मैंने तुम्हारा दिल दुखाया है तो मैं अपनी गलती मानने को तैयार हूँ।” रांझा बोला।

“आज इतनी जल्दी में थे कि मेरी नमस्ते और शुभरात्रि भी नहीं ली।” हीर ने रांझे से शिकायत की।

“ऐसा मत बोलो प्रिय, मैं फोन पर चुपचाप तेरी बातें सुन रहा था। सब लोग तेरे इर्द-गिर्द थे। अचानक फिर तेरी आवाज आनी बंद हो गई। कुछ देर तक फोन कान पर लगाए रखा, लेकिन तेरी आवाज नहीं आई.. मगर मोबाइल चालू था। फिर मैंने दुबारा फोन चेक किया तो देखा फोन कट चुका था। मैंने यह सोचकर कॉल बैक नहीं कि कहीं तेरे परिवार का कोई सदस्य फोन ना उठा ले। अगर ऐसा हुआ तो हम दोनों के लिए दिक्कत हो जायेगी।” रांझे ने हीर को सफाई दी।

“पता है पूरे 1 मिनट बाद मैंने फोन कट किया था। मैं हेलो- हेलो बोलकर थक गई, लेकिन तुमने कोई जवाब नहीं दिया। अब सो जाओ। सुबह बात करेंगे। रात के पौने दस बज रहे हैं यह समय तुम्हारे लिए भी सेफ नहीं है। तुम्हारे परिवार के लोग भी तुम पर नजर रख रहे होंगे।” हीर नाराजगी में बोली।

“अपना मूड खराब मत करो प्रिय। बिन बात के गुस्सा मत किया करो। गुस्से में तुम अच्छी नहीं लगती। मेरी जान, तुम दोबारा कॉल भी तो कर सकती थी। जब मुझे आवाज नहीं आ रही थी तो मैं क्या करता? बताओ। अब मान भी जाओ प्रिय। इतना गुस्सा ठीक नहीं होता।” रांझे ने हीर को मनाने की कोशिश की।

“मुझे नींद नहीं आ रही। तुम सो जाओ। मुझे तुमसे बात नहीं करनी।” हीर ने दोटूक जवाब दिया।

रांझे ने सोचा-हीर गुस्से में है। सुबह तक उसका गुस्सा ठंडा हो जायेगा। सुबह को उसको मना लूंगा। अब रात में बात बढ़ाने से कोई फायदा नहीं है। इसलिए रांझा डाटा ऑफ करके बिस्तर पर लेट गया लेकिन रांझे को नींद नहीं आ रही थी। उसे रह रहकर हीर का ख्याल आ रहा था।

1 घंटे बाद जब करवटें बदल-बदलकर भी उसको नींद ना आई तो रांझे ने अपना मोबाइल का डाटा ऑन कर लिया। वह फेसबुक चलाने लगा। फेसबुक पर उसे एक बहुत अच्छी लव पोस्ट नजर आई। वह पोस्ट रांझे ने हीर के नंबर पर तुरंत व्हाट्सएप कर दी..रांझे ने देखा कि हीर के नंबर पर पोस्ट फारवर्ड होते ही सीन हो गई। हीर जगी हुई थी और ऑनलाइन थी।

रांझे ने हीर से कहा-

“प्रिय हीर तुम तो 10:00 बजे तक सो जाती थी। इसका तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम दस बजे तक हर हाल में सो जाया करोगी, अपना ध्यान रखोगी, समय से सोओगी और समय से उठोगी। लेकिन अब तो रात के 11:00 बज रहे हैं। इस तरह तुम्हारा जागना ठीक नहीं है। तुम्हें नींद काफी कम आती है। चलो अब डाटा ऑफ करो और सो जाओ।”
रांझे ने हीर को प्यार से समझाकर सुलाने की कोशिश की लेकिन हीर बोली-

“नहीं मैं तो पूरी रात मोबाइल चलाऊंगी। तुम्हें इससे क्या? तुम्हें मेरी कहाँ परवाह है? तुम सो जाओ।”

यह सुनकर रांझे को गुस्सा आ गया। उसने हीर से कहा-

“मैं इतने प्यार से तुमसे बातें कर रहा हूँ और तुम बार-बार बदतमीजी दिखा रही हो। मुझसे ठीक से बात नहीं कर रही हो। अगर मेरा दिमाग खराब हो गया ना… तो मैं तुम्हें ब्लॉक कर दूंगा। तब इत्मीनान से रहना और मोबाइल चलाते रहना। मेरे सामने ऐसा करोगी और ऑनलाइन रहोगी तो.. मुझे तो दिक्कत होगी ही। मेरी पीठ पीछे जो मन करे वह करना।” रांझे ने हीर को धमकाने की कोशिश की ताकि वह मोबाइल साइड में रखकर सो जाये। लेकिन हीर बोली-

“तुम्हारी इतनी हिम्मत.. तुम मुझे ब्लॉक करोगे। हिम्मत है तो अभी के अभी मुझे ब्लॉक करके दिखाओ।”

“मुझे लगता है कि तुम्हें संबंध खराब करने हैं। तुम मुझसे परेशान हो। तुम्हें मेरे से ज्यादा बाकी चीजों की परवाह है। तुम इत्मीनान से रहो, खुश रहो, मौज करो। मैं ही फोन रखता हूँ।” रांझे ने कहा।

“नहीं, तुम मुझे ब्लॉक करो अभी के अभी।” हीर गुस्से में बोली।

रांझे ने स्थिति संभालते हुए कहा- “वह मैंने गुस्से से बोल दिया था प्रिय। तुम बात बढ़ाओ मत। तुम्हारी जितनी मर्जी उतनी देर मोबाइल देखो। मैं सो रहा हूँ, फोन रख कर।”

“बात तो अब आगे बढ़ ही गई है। तुम क्या मुझे ब्लॉक करोगे? मैं ही तुम्हें ब्लॉक करती हूँ..हमेशा हमेशा के लिए।”

यह कहकर हीर ने रांझे को ब्लॉक कर दिया। रांझा झटपटाता रह गया। जन्म-जन्मांतर का साथ… सारी कसमें.. वादें, प्यार.. अपनापन… खयाल रखना आदि सब धरा का धरा रह गया। हीर रांझे की एक और प्रेम कहानी ने मोबाइल नेटवर्क के कारण समय से पहले ही दम तोड़ दिया।

सच में आजकल का इंटरनेट वाला प्यार एकतरफा ही है। किसी के जीने-मरने या जिंदगी में आने-जाने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। लोग बहुत जल्द ही बेसिर पैर की बातों पर झगड़कर.. दूरी बना लेते हैं… इसके बाद भी उनका बार बार प्रेम होना बंद नहीं होता। वे अपने पहले प्रेम को भुलाकर दूसरे के प्रेम में पड़ जाते हैं।

आज, कोई किसी को सुनना, उसकी बात मानना पसंद नहीं करता। सब खुद को होशियार समझते हैं। सबको अपना पक्ष सही लगता है। इसलिए रिश्ता लम्बा नहीं चल पाता। अगर इंसान दूसरे इंसान की जगह खुदको रखकर देखे तो शायद उनके बीच पैदा हुई गलतफहमी दूर हो जाये और उनके प्रेम की लता फिर से हरी भरी हो जाये।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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