श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

उड़ीसा राज्य की पावन धरा,जगन्नाथपुरी धाम।
पुराणों में बैकुंठ धरा का,शत – शत करें प्रणाम।।

विग्रह रुप में तीनों विराजे,है जगन्नाथपुरी नाम।
कृष्ण,बहन सुभद्रा और साथ में भाई बलराम।।

विश्व कर्मा जी ने प्रतिमाओं का,किया है निर्माण।
दर्शन – मात्र से भक्तों का,यहाॅं होता है कल्याण।।

रथ – यात्रा का नगर भ्रमण,गूॅंजता है जयकारा।
जगन्नाथ जी के दर्शन करने,जाता है जग सारा।।

हवा के विपरीत झोंको में,धर्म – ध्वजा लहराती।
क्या राज छुपा इसमें,नहीं बात समझ में आती।।

महाप्रभु की महा रसोई,छप्पन भोग यहाॅं चढ़ता।
मनोकामनाऍं पूरी होती,श्री हरि के दर्शन करता।।

मंदिर शिखर पे लगा चक्र,नीलच्छत्र कहा जाता।
नीलच्छत्र – दर्शन जहाॅं तक,जगन्नाथ कहलाता।।

सत्य युग बद्रीनाथ,त्रेता युग में रामेश्वर की शान।
द्वापर का द्वारिका,कल युग में पुरी की पहचान।।

जगत के नाथ श्री जगन्नाथ जी का है ये निवास।
भक्तों की आस्था का केंद्र,है भक्तों का विश्वास।।

वेद – पुराण जिसकी महिमा,दुनिया में सारे गाते।
मीरा,तुलसी,सूरदास भी,दर्शन करने यहाॅं आते।।

B.S. Singh Chauhan

डॉ. भेरूसिंह चौहान “तरंग”
४रोहिदास मार्ग , झाबुआ
जिला – झाबुआ (म. प्र.)
पिन : ४५७६६१
मो.नंबर : ७७७३८६९८५८

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One Comment

  1. यह कविता जीवन और प्रकृति के बीच के संबंध को बहुत खूबसूरती से दर्शाती है। मछलियों और स्त्री के बीच की समानता को लेकर यह एक अद्भुत चित्रण है। कवि ने इसमें गहरी भावनाओं और समस्याओं को व्यक्त किया है। यह कविता हमें जीवन के मूल्य और स्त्रीत्व की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। क्या यह कविता हमें अपने अस्तित्व और प्रकृति के बीच के संबंध को फिर से परिभाषित करने के लिए प्रेरित करती है?

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