hosiyari

होशियारी

जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख में केवल पोस्टपेड सिम कार्ड ही काम करते हैं। सुरक्षा कारणों से प्रीपेड सिम कार्ड जम्मू-कश्मीर में काम नहीं करते हैं।

दोस्त के आश्वासन पर घूमने के इरादे से, मैं कश्मीर पहुंच चुका था। रात हो गई थी। शायद रात के 9 बज रहे थे। मुझे अभी अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचने के लिए (जिस जगह मेरा मित्र रहता था) कम से कम 2 घंटे की दूरी टैक्सी द्वारा तय करनी थी। एक टैक्सी वाले ने मुझसे पूछा-

“भाई साहब आपको कहाँ जाना है?”

मैंने उसको गंतव्य स्थल बताया तो उस टैक्सी ड्राइवर ने कहा कि वह वहीं से होकर गुजरेगा। इसके बाद वह मुझसे टैक्सी में बैठने को कहने लगा।

मैंने कहा-

“भैया, टैक्सी में तो मैं बैठ जाऊंगा, लेकिन मुझे एक कॉल करनी है। यहाँ मेरा सिम काम नहीं कर रहा है। मुझे अपने दोस्त को सूचना देनी है तथा यह पता करना है कि मुझे कहाँ उतरना है? उसे मुझ तक पहुँचने में कितना समय लगेगा?”

“बैठो तो सही। कॉल भी करवा दूँगा।”
मैं उस टैक्सी ड्राइवर के आश्वासन पर गाड़ी में बैठ गया। मुझे मेरे मित्र की बात याद आ रही थी। उसने मुझे बताया था कि यहाँ के टैक्सी ड्राइवर बहुत तेज होते हैं। वे घूमने आने वाले नए लोगों को आश्वासन देकर गाड़ी में बैठा लेते हैं। नए व्यक्तियों को उनका गंतव्य स्थान बताकर कहीं भी.. बीच रास्ते में छोड़ देते हैं।

नये व्यक्तियों को नई जगह की कोई जानकारी होती नहीं है। इसलिए उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। फिर दूसरी सवारी करके वहाँ तक पहुंचना पड़ता है। बहुत बार टैक्सी चालक बाईपास से भी निकाल लेते हैं। इससे क़ई किलोमीटर की दूरी बढ़ जाती है। कहीं ऐसा ना हो कि मैं तुम्हें और तुम मुझे ढूंढते रहो। तुम्हारा तो सिम भी काम नहीं करेगा, इसलिए तुम मेरी बात टैक्सी ड्राइवर से करवा देना। मैं उसको बता दूँगा कि तुम्हें कहाँ उतारना है?

टैक्सी चल पड़ी थी। करीब आधा घंटा टैक्सी चलाने के बाद, टैक्सी ड्राइवर ने टैक्सी चलाते हुए ही.. यात्रियों से रुपए लेने शुरू किये। टैक्सी ड्राइवर ने मुझसे भी रुपए मांगे। मैंने कहा-

“भैया, रुपये तो मैं दे दूंगा लेकिन पहले आप मेरी फोन पर बात करवाओ। मुझे अपने मित्र से बात करनी है।”

टैक्सी वाला बोला-

“बात तो मैं आगे करवा दूंगा। पहले मेरे रुपये दो।”

“मैं रुपये तब तक नहीं दूंगा, जब तक मेरी बात, मेरे मित्र से ना हो जायेगी।” दो टूक मैंने अपनी बात कही।

“मेरे सिम में रुपए नहीं है। रिचार्ज खत्म हो गया है, इसलिए मैं तुम्हारी बात नहीं करवा सकता। जहाँ उतरोगे वहाँ किसी से मोबाइल लेकर बात कर लेना।” टैक्सी ड्राइवर द्वारा बात न करवाने का बहाना बनाने पर मैंने भी बेशर्मी से जवाब दिया-

“मेरे पास भी रुपए नहीं है। मैं तुम्हें रुपए कहाँ से दूँ?”

“रुपए दे रहा है कि नहीं दे रहा?” बदतमीजी से टैक्सी ड्राइवर मुझसे बोला।

“जब मेरे पास रुपए हैं ही नहीं, तो मैं रुपए कहाँ से दूंगा?” मैंने भी गुस्से में जवाब दिया।

मेरे द्वारा रुपए न देने पर, टैक्सी ड्राइवर ने गाड़ी बीच रास्ते में रोककर.. जबरन मुझे उतार दिया। मुझे टैक्सी वाले पर बहुत गुस्सा आ रहा था। मैंनें भी उसको सबक सिखाने की ठान ली थी। टैक्सी से उतरते ही मैंनें टैक्सी का और उस टैक्सी ड्राइवर का फोटो खींच लिया। यह देखकर टैक्सी ड्राइवर सकपकाया। घबराकर बोला

“तुमने मेरा और गाड़ी का फोटो क्यों खींचा?

“मेरी मर्जी। तुम इत्मीनान से जाओ। यहाँ रुककर क्या कर रहे हो? तुमने तो मुझे उतार दिया है। अब तुम क्यों घबरा रहे हो?”

टैक्सी वाले को लगा, कहीं मैं उसकी पुलिस में शिकायत ना कर दूँ। उसे कार्यवाही का डर सताने लगा। उसे यह भी लगा- अगर ये व्यक्ति या इसका कोई परिचित किसी बड़ी पोस्ट पर हुआ तो मैं दिक्कत में आ जाऊंगा। इसलिए वह नरम लहजे में बोला-

“आप चलकर गाड़ी में बैठिए।”

मैंने मना कर दिया। उसने पुनः रिक्वेस्ट की तो मैंने उसको खरी खोटी सुनाते हुए कहा-

“दूर-दूर से यहाँ घूमने आने वाले यात्रियों से तुम्हें अच्छे से पेश आना चाहिए ताकि समाज में एक अच्छा मैसेज जाए। लेकिन तुम्हारा व्यवहार ऐसा होगा, यह मुझे नहीं पता था। यह बड़े शर्म की बात है। टैक्सी स्टैंड पर तो बहुत प्यार से बातें कर रहे थे। लेकिन तुम्हारा असली चेहरा अब सामने आया।

रात के वक्त दूर-दूर तक सन्नाटा और घुप अंधेरे में… सड़क पर अनजान यात्री को छोड़ देना… कितना समझदारी भरा फैसला है तुम्हारा? चाहे कोई यात्री को लूट ले या मार कर डाल दे। लेकिन तुम्हें इससे क्या फर्क पड़ेगा? अगर तुम्हें मेरे साथ ऐसा ही करना था तो मुझे अपनी टैक्सी में बैठाया ही क्यों?”

वह चुपचाप सुनता रहा। उसने फिर से मुझसे गाड़ी में बैठने की विनती की। ना चाहते हुए भी मुझे उसकी टैक्सी में बैठना पड़ा क्योंकि दूर-दूर तक सवारी का कोई और साधन नजर नहीं आ रहा था। पूरे रास्ते उसकी मुझसे रुपए मांगने की हिम्मत नहीं हुई। जब मेरा गंतव्य स्थल आने को हुआ तो उसने मुझे अपना फोन दिया और कहा- “अपने दोस्त को फोन करके बुला लो और बता दो कि हम यहाँ पर हैं।”
मैंने अपने मित्र से बात की और उसको अपनी वर्तमान लोकेशन बताई।
मित्र ने कहा कि उसको आने में लगभग 20 मिनट लगेंगे। जब तक मेरा दोस्त मुझ तक नहीं पहुँच गया, वह टैक्सी ड्राइवर वहीं मेरे साथ अपनी टैक्सी रोककर खड़ा रहा। उसको अभी भी डर था, कहीं मैं उसकी कंप्लेंन ना कर दूँ। दोस्त को सामने देखकर मुझे काफी राहत मिली। मैंने पर्स से ₹1000 निकाल कर टैक्सी ड्राइवर को दिए और कहा

“इनको रख लीजिए। ये तुम्हारा किराया है।”

“तुम तो मना कर रहे थे कि तुम्हारे पास रुपए नहीं है। अब ये रुपए तुम्हारे पास कहाँ से आ गए?” टैक्सी वाला बोला।

“तुम भी तो मना कर रहे थे कि मेरे मोबाइल में रिचार्ज नहीं है, फिर बाद में अचानक रिचार्ज कहाँ से हो गया?” मैंने जवाब दिया।

यह सुनकर टैक्सीवाला मुस्कुराने लगा। उसको मुस्कुराता देखकर मेरे चेहरे पर भी हंसी आ गई।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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